Sunday, November 7, 2010

सेक्स संबंधी डाक्टरी सलाह

सेक्स संबंधी डाक्टरी सलाह


हम अपने पाठकों के लिए सेक्स संबंधी सलाह के लिए डॉ० मीना कपूर से आपकी सेक्स सम्बन्धी समस्याओं पर सलाह लेंगे एवं आपके समस्याओं को यहाँ भी प्रकाशित किया जाएगा ताकि हमारे अन्य पाठक उसका लाभ उठा सकें। डॉ० साहिबा से हमारे कुछ पाठकों की समाया यहाँ प्रकाशित की जा रही है-




प्रीती
, दिल्ली- डॉ० साहिबा,मुझे मै 2८ साल की हूँ। मेरे पति मेरे साथ लगभग रोज़ ही सेक्स करते हैं। मुश्किल ये की मेरे पति हर दूसरे दिन मुझसे अपना लिंग का मुख मैथुन करवातें और सारा माल मुझे पी जाने को कहते हैं.मै उनका माल पी जाती हूँ. बदले में वो भी मेरे योनी का मुख मैथुन कर के मेरे पानी को पीते हैं। लेकिन मुझे डर है की कहीं मै या वो इस क्रिया से बीमार न हो जाएँ ।
डॉ० मीना कपूर- प्रीती , यूँ तो मुख मैथुन भी सेक्स का एक हिस्सा ही है। एवं इस से कोई बीमारी नही होती है। लेकिन मुख मैथुन करने में एक चीज़ का अवश्य ही ध्यान रखना चाहिए की मुख मैथुन से पहले लिंग एवं योनी को डिटोल साबुन से धो ले। इस से किसी प्रकार का इन्फेक्सन नही होगा।

साधना, लुधियाना - डॉ० साहिबा, मै 21 साल की हूँ। मै अपने पिता के साथ पिछले ३ वर्षों से सेक्स करती आ रही हूँ। मेरी माँ भी इस में शामिल होती है। मतलब हम तीनो ही एक साथ सेक्स करते हैं। मुश्किल ये है की अब मै शादी करना चाहती हूँ। मगर मेरे पिता नही चाहते की मै शादी करके उनसे दूर चली जाऊं जिस से की हमारे बीच के शारीरिक सम्बन्ध ख़तम हो जाए। मै क्या करूं?

डॉ० मीना कपूर- साधना, आप अपने पिता से सेक्स में रूचि लेना बंद कर दें। उनको अहसास दिलाएं की आप बूढ़े हो गए हैं और आपके वश में आपका लिंग नही रहता है। आप उनसे एक दिन में ३ -४ बार सेक्स करने बोलें। वो नही कर पायेंगे तो उनको लगेगा की वो बूढ़े हो गए हैं और अपनी जवान बेटी की हसरतें पूरी करने में अक्षम है। वो धीरे धीर आपकी शादी की बात मान जायेंगे।


राहुल, बंगलौर -
डॉ. साहिबा, मेरी उम्र 19 साल की है लेकिन मेरा लंड का साइज़ सिर्फ 3 इंच है. मै इसे बड़ा करना चाहता हूँ. कृपया कोई उपाय बताएं .

डॉ
. मीना- लंड के साइज़ में वृद्धी के लिए जानकारी पाने के लिए निम्लिखित लिंक पर क्लिक करें - http://mastkahaniyan.blogspot.com/2008/10/blog-post_26.html


विकास, नागपुर
- मैडम , मेरी उम्र 22 साल की है. मेरी दो प्रोब्लम है. पहला तो मेरा लंड का साइज़ खड़ा होने पर 3 .5 इंच का ही है तथा दुसरा प्रोब्लम मेरा शारीरक सम्बन्ध मेरी भाभी से है. जब भी मै उसे चोदता हूँ मेरा माल उसके माल से पहले ही यानि सिर्फ 2 मिनट में ही निकल जाता है जिस से मुझे भाभी मेरा मज़ाक उडाती है. कृपया लंड बड़ा करने और अधिक देर तक चुदाई का कोई मंत्र बताएं.

डॉ. मीना- विकास, आप अपने लंड का साइज़ बड़ा करने और अधिक देर तक चुदाई करने के लिए जानकारी प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित लिंक पर क्लिक करें. -
http://mastkahaniyan.blogspot.com/2008/10/blog-post_26.html



कुणाल, मसूरी
- मैडम, मेरी गर्लफ्रेंड मृणाली (22 ) मुझसे सेक्स तो करती है मगर गांड नहीं मरवाती है. क्यों कि उसे गांड मरवाने में तकलीफ होती है. कृपया गांड मारने की कोई ऐसी तरकीब बताएं जिस से मेरी गर्लफ्रेंड मृणाली को कोई तकलीफ ना हो.

डॉ. मीना- कुणाल. गुदा सम्भोग भी सम्भोग का प्रमुख हिस्सा है. वस्तुतः गांड मारने में लोग जल्दीबाजी करते हैं इसलिए लड़कियां और औरतें अक्सर गांड मरवाने से हिचकतीं हैं. सही तरीके से गांड मारने की विधि को जाने के लिए निम्नलिखित लिंक पर क्लिक करें.
http://mastkahaniyan.blogspot.com/2008/10/blog-post_11.html


सारिका, दिल्ली- डा साहिबा, मै ३२ साल की हूँ। मेरे पति बड़े अधिकारी हैं। हालांकि मुझे उनके साथ कोई सेक्स सम्बन्धी प्रॉब्लम नहीं है क्यों कि उनके लंड का साइज़ करीब ६ इंच है और हर २-३ दिन में एक बार वो मेरी चुदाई कर ही डालते हैं। लेकिन मुझे हमेशा यह लगता है कि वो मेरी चुदाई कर रहे हैं लेकिन मै एन्जॉय नहीं कर पा रही हूँ। कोई रोमांच नाम कि चीज ही नहीं होती है। करीब २ महीने पहले से हमारे यहाँ १७-१८ साल का एक नेपाली नौकर काम करने आया हुआ है। एक दिन मेरे पति काम के सिलसिले में मुंबई गए हुए थे और मुझे शरारत करने को सूझी। मैंने अपने नौकर को अपने कमरे में बुलाया और मेरे देह की मालिश करने को कहा। मालिश करवाते करवाते मैंने उस से अपने सारे कपडे उतरवा लिए। सिर्फ ब्रा और पेंटी पहनी हुई रही। मै देखना चाहती थी की मेरे बदन को देख कर उसे कैसा महसूस हो रहा है। मैंने देखा की वो ज्यादा उत्तेजित नहीं था। शायद उसे शर्म आ रही थी। ये देख कर मेरे अन्दर एक मर्द जाग उठा। मैंने उसे आदेश दिया अपने शरीर से मेरी देह की मसाज कर। मैंने उसे उसके कपडे उतारने को कहा। पहले तो वो थोडा हिचकिचाया लेकिन जब मैंने थोड़े कड़े आवाज में कहा- जैसा कहती हूँ वैसा कर नहीं तो भगा दूँगी तब वो अपने कपडे उतारने को राजी हुआ। जब उसने पूरे कपडे खोल दिए तो मैंने उसके लंड को देखा तो एक दम छोटा सा लंड था वो भी बिलकुल सिमटा हुआ। हलके हलके बाल थे। मैंने उस को कहा मेरे शरीर पर लेट जा और जोर जोर से दबा दबा कर मेरी मसाज कर। मै पीठ के बल ही लेती रही और मेरे शरीर पर लेट गया और कस कस कर मेरे शरीर को दबाने लगा। मुझे बड़ा ही आनंद आ रहा था। मैंने उसको अपनी चूची को जोर जोर से दबाने को कहा। वो मेरी चूची को ब्रा के ऊपर से ही दबाने लगा। मैंने कहा- और कस के दबा। वो थोडा और जोर से दबाने लगा। मुझे बहूत ही मज़ा आ रहा था। मैंने कहा- १ मिनट रुको। और मैंने अपना ब्रा खोल दिया और कहा- अब दबा जोर जोर से। वो दोनों हांथों से जोर जोर से मेरी दोनों चूची दबाने लगा। मुझे काफी आनंद आ रहा था। मेरे हाथ उसके लंड की तरफ अपने आप ही बढ़ गए। मैंने देखे की उसकी लंड खड़ा हो गया था लेकिन मात्र ४ इंच का ही लुंड था। मुझे उसके छोटे से लंड को सहलाने में बड़ा ही मज़ा आ रहा था। मैंने कहा- मेरी जांघिया खोल दे। उसने मेरी पेंटी खोल दी। अब मेरे बुर पर उसके छोटे से लंड से खुल्लम खुल्ला मुकाबला हो रहा था। मुझे रहा नहीं गया और मैंने अपनी टांगें फैला कर उसके लंड को अपने बुर में डाल दिया। कहा- ज़रा बुर की भी मालिश कर दे। हालांकि उसकी लंड सिर्फ बाहर से देखने पर छोटा था लेकिन जब उसने मेरी चुदाई चालु की तो मुझे पता भी नहीं चला की कोई छोटा लंड मेरी बुर की चुदाई कर रहा है। उस ४ इंच के लंड में भी वही बात थी जो मेरे पति का ७ इंच के लंड में है। दोनों ही मेरे बुर की बुरी हालत करने के लिए काफी थे। तब मैंने समझा कि लंड हमेशा लंड ही होता है और वो किसी भी साइज़ का हो , बुर को हमेशा चोद ही देता है। थोड़ी देर में उसका माल निकल गया। लेकिन अभी भी उसकी लंड टाईट ही था। मेरा मन भी अभी नहीं भरा था। मै उस से हार मानने के मूड में नहीं थी और मै चाहती थी कि किसी मोड़ पे ये हार मान जाये कि लंड छोटा होने कि वजह से ये नहीं कर पायेगा। मैंने उस से कहा कि मेरी गांड कि भी मालिश कर दे। मुझे लगा कि शायद ये कहेगा कि ये काम मेरे लंड की पहुँच से दूर है। लेकिन वो तुरंत ही तैयार हो गया। मैंने भी सोचा - अच्छा , चलो कर के देखते हैं की ये कर भी पायेगा या नहीं। उसने मेरी कमर को ऊपर की तरफ उठाया और मेरे गांड को अपने लंड के सीध में ले आया। वो ठेहुने के बल बिस्तर खड़ा हो गया। मै सामने की तरफ झुक कर उसके आक्रमण का इंतज़ार करने लगी। उसने अपने दोनों हाथो की अंगूठे से मेरे गांड को फैलाया और एक झटके में ही पूरा लंड मेरे गांड में घूसा दिया। मै दर्द से तड़प गयी। लेकिन उसने पूरी तरह से लंड को मेरे गांड के अन्दर डाल दिया। फिर आराम से मेरे गांड की भी चुदाई करने लगा। मुझे काफी आनन्द आ रहा था। अब मेरा रस मेरे बुर से टप टप गिरने लगा। लेकिन मेरे आनंद में कोई कमी नहीं आ रही थी। १०-१२ मिनट तक मेरी गांड चुदाई करने के बाद उसने मेरे गांड में ही रस गिरा दिया। उसने जिस तरह से मेरे गांड की मालिश की की मै उसकी मुरीद हो गयी हूँ और हर २-३ दिन पर उस से अपने गांड की मालिश जरूर करवाती हूँ। डा० साहिबा, मै यह जानना चाहती हूँ की पराये मर्द से गांड की चुदाई करवाने से कोई प्रॉब्लम तो नहीं होगा न?

मेरी सेक्सी दीदी

मेरी बी.ऐ की परीक्षा ख़तम हो गई थी। मै अपनी चचेरी दीदी के यहाँ घूमने नैनीताल गया। उनसे मिले हुए मुझे कई साल हो गए थे। जब में सातवीं में पढता था तभी उनकी शादी फौज के रणवीर सिंह के साथ हो गई। अब वो लोग नैनीताल में रहते थे। मेंने सोचा चलो दीदी से मिलने के साथ साथ नैनीताल भी घूम लूँगा। वहां पहुँचने पर दीदी बहूत खुश हुई।

बोली - अरे तुम इतने बड़े हो गए। मैंने तुम्हे जब अपनी शादी में देखा था तो तुम सिर्फ़ ११ साल के थे।

मैंने कहा - जी दीदी अब तो मै बीस साल का हो गया हूँ।

दीदी ने मुझे खूब खिलाया पिलाया। जीजा जी अभी पिछले तीन महीने से कश्मीर में अपनी ड्यूटी पर थे। दीदी की शादी हुए आठ साल हो गए थे। दीदी की एक मात्र संतान तीन साल की जूही थी जो बहूत ही नटखट थी। वो भी मुझसे बहूत ही घुल -मिल गई। शाम को जीजा जी का फ़ोन आया तो मैंने उनसे बात की। वो भी बहूत खुश थे मेरे आने पर।
बोले - एक महीने से कम रहे तो कोर्ट मार्शल कर दूँगा।

रात को यूँ ही बातें करते करते और पुरानी यादों को ताज़ा करते करते मै अपने कमरे में सोने चला गया। दीदी ने मेरे लिए बिस्तर लगा दिया
और बोली - अब आराम से सो जाओ।

मै आराम से सो गया। किंतु रात के एक बजे नैनीताल की ठंडी हवा से मेरी नींद खुल गई। मुझे ठण्ड लग रही थी। हालाँकि अभी मई का महिना था लेकिन मै मुंबई का रहने वाला आदमी भला नैनीताल की मई महीने की भी हवा को कैसे बर्दाश्त कर सकता। मेरे पास चादर भी नही था। मैंने दीदी को आवाज लगाई । लेकिन वो शायद गहरी नींद में सो रही थी। थोडी देर तो मै चुप रहा लेकिन जब बहूत ठण्ड लगने लगी तो मै उठ कर दीदी के कमरे के पास जा कर उन्हें आवाज लगाई। दीदी मेरी आवाज़ सुन कर हडबडी से उठ कर मेरे पास चली आई और

कहा - क्या हुआ गुड्डू?

वो सिर्फ़ एक गंजी और छोटी सी पेंट जो की औरतों की पेंटी से थोडी ही बड़ी थी। गंजी भी सिर्फ़ छाती को ढंकने की अधूरी सी कोशिश कर रही थी। में उनकी ड्रेस को देख के दंग रह गया। दीदी की उमर अभी उनतीस या तीस की ही होती रही होगी। सारा बदन सोने की तरह चमक रहा था। में उनके बदन को एकटक देख ही रहा था की दीदी ने फिर

कहा- क्या हुआ गुड्डू?

मेरी तंद्रा भंग हुई।

मैंने कहा -दीदी मुझे ठण्ड लग रही है। मुझे चादर चाहिए।

दीदी ने कहा - अरे मुझे तो गर्मी लग रही है और तुझे ठंडी?

मैंने कहा -मुझे यहाँ के हवाओं की आदत नही है ना।

दीदी ने कहा -अच्छा तू रूम में जा , में तेरे लिए चादर ले कर आती हूँ।

मै कमरे में आ कर लेट गया। मेरी आंखों के सामने दीदी का बदन अभी भी घूम रहा था। दीदी का अंग अंग तराशा हुआ था। थोडी ही देर में दीदी एक कम्बल ले कर आयी और मेरे बिस्तर पर रख दी।

बोली - पता नही कैसे तुम्हे ठण्ड लग रही है। मुझे तो गर्मी लग रही है। खैर , कुछ और चाहिए तुम्हे?

मैंने कहा- नही, लेकिन कोई शरीर दर्द की गोली है क्या?

दीदी बोली- क्यों क्या हुआ?

मैंने कहा - लम्बी सफर से आया हूँ। बदन टूट सा रहा है।

दीदी ने कहा- गोली तो नही है। रुक में तेरे लिए कॉफ़ी बना के लाती हूँ। इससे तेरा बदन दर्द दूर हो जायेगा.

मैंने कहा- छोड़ दो दीदी , इतनी रात को क्यों कष्ट करोगी?

दीदी ने कहा -इसमे कष्ट कैसा? तुम मेरे यहाँ आए हो तो तुम्हे कोई कष्ट थोड़े ही होने दूँगी।

कह कर वो चली गई। थोडी ही देर में वो दो कप कॉफ़ी बना लायी। रात के डेढ़ बाज़ रहे थे। हम दोनों कॉफ़ी पीने लगे।

कॉफ़ी पीते पीते वो बोली - ला, में तेरा बदन दबा देती हूँ। इस से तुम्हे आराम मिलेगा।

मैंने कहा - नही दीदी, इसकी कोई जरूरत नही है। सुबह तक ठीक हो जाएगा।

लेकिन दीदी मेरे बिस्तर पर चढ़ गई
और बोली - तू आराम से लेटा रह मै अभी तेरी बदन की मालिश कर देती हूँ .

कहते कहते वो मेरे जाँघों को अपनी जाँघों पे रख कर उसे अपने हाथों से दबाने लगी। मैंने पैजामा पहन रखा था। वो अपनी नंगी जाँघों पर मेरे पैर को रख कर उसे दबाने लगी।

दबाते हुए बोली - एक काम कर, पैजामा खोल दे, सारे पैर में अच्छी तरह से तेल मालिश कर दूँगी। ।

अब मैं किसी बात का इनकार करने का विचार त्याग दिया। मैंने झट अपना पैजामा खोल दिया। अब मैं अंडरवियर और बनियान में था। दीदी ने फिर से मेरे पैर को अपनी नंगी जांघों पे रख कर तेल लगा कर मालिश करने लगी। जब मेरे पैर उनकी नंगी और चिकनी जाँघों पे रखी थी तो मुझे बहूत आनंद आने लगा। दीदी की चूची उनकी ढीली ढीली गंजी से बाहर दिख रही थी. उसकी चूची की निपल उनकी पतली गंजी में से साफ़ दिख रही थी. मै उनकी चूची को देख देख के मस्त हुआ जा रहा था. उनकी जांघ इतनी चिकनी थी की मेरे पैर उस पर फिसल रहे थे. उनका हाथ धीरी धीरे मेरे अंडरवियर तक आने लगा। उनके हाथ के वहां तक पहुंचने पर मेरे लंड में तनाव आने लगा। मेरा लंड अब पूरी तरह से फनफनाने लगा। मेरा लंड अंडरवियर के अन्दर करीब छः इंच ऊँचा हो गया। दीदी ने मेरी पैरों को पकड़ कर मुझे अपनी तरफ खींच लायी और मेरे दोनों पैर को अपने कमर के अगल बगल करते हुए मेरे लंड को अपने चूत में सटा दी. मुझे दीदी की मंशा गड़बड़ लगने लगी. लेकिन अब मै भी चाहता था कि कुछ ना कुछ गड़बड़ हो जाने दो.

दीदी ने कहा - गुड्डू , तू अपनी बनियान उतर दो न। छाती की भी मालिश कर दूँगी।

मैंने बिना समय गवाए बनियान भी उतर दिया। अब मैं सिर्फ़ अंडरवियर में था। वो जब भी मेरी छाती की मालिश के लिए मेरे सीने पर झुकती उनका पेट मेरे खड़े लंड से सट रहा था. शायद वो जान बुझ कर मेरे लंड को अपने पेट से दबाने लगी. एक जवान औरत मेरी तेल मालिश कर रही है। यह सोच कर मेरा लिंग महाराज एक इंच और बढ़ गया। इस से थोडा थोडा रस निकलने लगा जिस से की मेरा अंडरवियर गीला हो गया था.

अचानक दीदी ने मेरे लिंग को पकड़ कर कहा - ये तो काफी बड़ा हो गया है तेरा।

दीदी ने जब मुझसे ये कहा तो मुझे शर्म सी आ गयी कि शायद दीदी को मेरा लंड बड़ा होना अच्छा नही लग रहा था. मुझे लगा शायद वो मेरे सुख के लिए मेरा बदन मालिश कर रही है और मै उनके बदन को देख कर मस्त हुआ जा रहा हूँ और गंदे गंदे ख़याल सोच कर अपना लंड को खड़े किये हुआ हूँ.

इसलिए मैंने धीमे से कहा- ये मैंने जान बुझ कर नहीं किया है. खुद ब खुद हो गया है.

लेकिन दीदी मेरे लंड को दबाते हुए मुस्कुराते हुए कही- बच्चा बड़ा हो गया है. जरा देखूं तो कितना बड़ा है मेरे भाई का लंड.

ये कहते हुए उसने मेरा अंडरवियर को नीचे सरका दिया. मेरा सात इंच का लहलहाता हुआ लंड मेरी दीदी की हाथ में आ गया. अब में पूरी तरह से नंगा अपनी दीदी के सामने था। दीदी ने बड़े प्यार से मेरे लिंग को अपने हाथ में लिया। और उसमे तेल लगा कर मालिश करने लगी।

दीदी ने कहा - तेरा लिंग लंबा तो है मगर तेरी तरह दुबला पतला है। मालिश नही करता है इसकी?

मैंने पुछा - जीजा जी का लिंग कैसा है?

दीदी ने कहा- मत पूछो। उनका तो तेरे से भी लंबा और मोटा है।

वो बोली- कभी किसी लड़की को नंगा देखा है?

मैंने कहा - नहीं.

उसने कहा - मुझे नंगा देखेगा?

मैंने कहा - अगर तुम चाहो तो .

दीदी ने अपनी गंजी एक झटके में उतार दी.
गंजी के नीचे कोई ब्रा नही थी। उनके बड़ी बड़ी चूची मेरे सामने किसी पर्वत की तरह खड़े हो गए।उनकी दो प्यारी प्यारी चूची मेरे सामने थी.

दीदी पूछी- मुठ मारते हो?

मैंने कहा - हाँ।

दीदी- कितनी बार?

मैंने - एक दो दिन में एक बार।

दीदी- कभी दूसरे ने तेरी मुठ मारी है?

मैंने -हाँ ।

दीदी- किसने मारी तेरी मुठ?

मैंने- एक बार में और मेरा एक दोस्त ने एक दुसरे की मुठ मारी थी।

दीदी - कभी अपने लिंग को किसी से चुसवा कर माल निकाला है तुने?

मैंने- नही।

दीदी - रुक , आज में तुम्हे बताती हूँ की जब कोई लिंग को चूसता है तो चुस्वाने वाले को कितना मज़ा आता है।

इतना कह के वो मेरे लिंग को अपने मुंह में ले ली। और पूरे लिंग को अपने मुंह में भर ली। मुझे ऐसा लग रहा था की वो मेरे लिंग को कच्चा ही खा जायेगी। अपने दाँतों से मेरे लिंग को चबाने लगी। करीब तीन चार मिनट तक मेरे लिंग को चबाने के बाद वो मेरे लिंग को अपने मुंह से अन्दर बाहर करने लगी। एक ही मिनट हुआ होगा की मेरा माल बाहर निकलने को बेताब होने लगा।

मैंने- दीदी , छोड़ दो, अब माल निकलने वाला है।

दीदी - निकलने दो ना .

उन्होंने मेरे लिंग को अपने मुंह से बाहर नही निकाला। लेकिन मेरे माल बाहर आने लगा। दीदी ने सारा माल पी जाने के पूरी कोशिश की लेकिन मेरे लिंग का माल उनके मुंह से बाहर निकल कर उनके गालों पर भी बहने लगा। गाल पे बह रहे मेरे माल को अपने हाथों से पोछ कर हाथ को चाटते हुए
बोली - अरे, तेरा माल तो एकदम से मीठा है। कैसा लगा आज का मुठ मरवाना?

मैंने - अच्छा लगा।

दीदी - कभी किसी बुर को चोदा है तुने?

मैंने - नही, कभी मौका ही नही लगा।

फिर बोली- मुझे चोदेगा?

मैंने - हाँ।

दीदी - ठीक है .

कह कर दीदी खड़ी हो गई और अपनी छोटे से पैंट को एक झटके में खोल दिया। उसके नीचे भी कोई पेंटी नही थी। उसके नीचे जो था वो मैंने आज तक हकीकत में नही देखा था। एक दम बड़ा, चिकना , बिना किसी बाल का, खुबसूरत सा बुर मेरी आँखों के सामने था।

अपनी बुर को मेरी मुंह के सामने ला कर बोली - ये रहा मेरा बुर, कभी देखा है ऐसा बुर ? अब देखना ये है की तुम कैसे मुझे चोदते हो। सारा बुर तुम्हारा है। अब तुम इसका चाहे जो करो।

मैंने कहा- दीदी, तुम्हारा बुर एकदम चिकना है। तुम रोज़ शेव करती हो क्या?

दीदी- तुम्हे कैसे पता की बुर चिकना होता है की बाल वाला??

मैंने कहा- वो मैंने अपनी नौकरानी का बुर तीन चार बार देखा है। उसके बुर में एकदम से घने बाल हैं। उसकी बुर तो काली भी है। तुम्हारी तरह सफ़ेद बुर नही है उसकी।

दीदी- अच्छा, तो तुमने अपनी नौकरानी की बुर कैसे देख ली है?

मैंने कहा - वो जब भी मेरे कमरे में आती है ना तो अगर मुझे नही देखती है तो मेरे शीशे के सामने एकदम से नंगी हो कर अपने आप को निहारा करती है। उसकी यह आदत मैंने एक दिन जान लिया । तब से में तीन चार बार जान बुझ कर छिप जाता हूँ और वो सोचती थी की में यहाँ कमरे नही हूँ, वो वो नंगी हो मेरे शीशे के सामने अपने आप को देखती थी।

दीदी- बड़े शरारती हो तुम।

मैंने कहा- वो तो मैंने दूर से काली सी गन्दी सी बुर को देखा था जो की घने बाल के कारण ठीक से दिखाई भी नही देते थे। लेकिन आपकी बुर तो एक दम से संगमरमर की तरह चमक रही है।

दीदी- वो तो में हर संडे को इसे साफ़ करती हूँ। कल ही न संडे था। कल ही मैंने इसे साफ़ किया है।

अब मुझसे रहा नही जा रहा था। समझ में नही आ रहा था की कहाँ से स्टार्ट किया जाए ? मुझे कुछ नही सूझा तो मैंने दीदी को पहले अपनी बाहों से पकड़ कर बिस्तर पर लिटा दिया ।अब वो मेरे सामने एकदम नंगी पड़ी थीं । पहले मैंने उनके खुबसूरत जिस्म का अवलोकन किया ।दूध सा सफ़ेद बदन। चुचियों की काया देखते ही बनती थी । लगता था संगमरमर के पत्थर पे किसी ने गुलाब की छोटी कली रख दिया हो। उनकी निपल एकदम लाल थी। सपाट पेट। पेट के नीचे मलाईदार सैंडविच की तरह फूली हुई बुर . बुर का रंग एकदम सोने के तरह था। उनके बुर को हाथ से फाड़ कर देखा तो अन्दर लाल लाल तरबूज की तरह नज़ारा दिखा। कही से भी शुरू करूं तो बिना सब जगह हाथ मारे उपाय नही दिखा। सोचा ऊपर से ही शुरू किया। जाए । मैंने सबसे पहले उनके रसीले लाल ओठों को अपने ओठों में भर लिया । जी भर के चूमा । इस दौरान मेरे हाथ दीदी के चुचियों से खेलने लगे । दीदी ने भी मेरा किस का पूरा जवाब दिया . फिर में उनके ओठों को छोड़ उनके गले होते हुए उनकी चूची पर आ रुका . काफ़ी बड़ी और सख्त चूचियां थी . एक बार में एक चूची को मुंह में दबाया और दुसरे को हाथ से मसलता रहा . थोडी देर में दूसरी चूची का स्वाद लिया . चुचियों का जी भर के रसोस्वदन के बाद अब बारी थी उन के महान बुर के दर्शन का . ज्यों ही में उन के बुर पास अपना सर ले गया मुझसे रहा नही गया और मैंने अपनी जीभ को उनके बुर के मुंह पर रख दिया . स्वाद लेने की कोशिश की तो हल्का सा नमकीन सा लगा । मजेदार स्वाद था . अब में पूरी बुर को अपने मुंह में लेने की कोशिश करने लगा . दीदी मस्त हो कर सिसकारी निकालने लगी . मैं समझ रहा था कि दीदी को मज़ा आ रहा है . मैं और जोर जोर से दीदी का बुर को चुसना शुरू किया . करीब पन्द्रह मिनट तक में दीदी का बुर का स्वाद लेता रहा । अचानक दीदी ज़ोर से आँख बंद कर के कराही और उन के बुर से माल निकल कर उनके बुर के दरार होते हुए गांड की दरार की और चल दिए . मैंने जहाँ तक हो सका उनके बुर का रस का पान किया . मैंने देखा अब दीदी पहले की अपेक्षा शांत हैं . लेकिन मेरा लिंग महाराज एकदम से तनतना गया . मैंने दीदी के दोनों पैरों को अलग अलग दिशा में किया और उनके बुर की छिद्र पर अपना लिंग रखा और धीरे धीरे दीदी के बदन पर लेट गया . इस से मेरा लिंग दीदी के बुर में प्रवेश कर गया . ज्यों ही मेरा लिंग दीदी के बुर में प्रवेश किया दीदी लगभग छटपटा उठी .

मैंने कहा - क्या हुआ दीदी, जीजा जी का लिंग तो मुझसे भी मोटा है ना तो फ़िर तुम छटपटा क्यों रही हो ?

दीदी - तीन महीने से कोई लिंग बुर में नही ली हूँ न इसलिए ये बुर थोड़ा सिकुड़ गया है .उफ़, लगता नही है की तुम्हे चुदाई के बारे में पता नही है। कितनो की ली है तुने?

मैं बोला- कभी नही दीदी, वो तो में फिल्मों में देख के और किताबों में पढ़ कर सब जानता हूँ।

दीदी बोली- शाबाश गुड्डू, आज प्रेक्टिकल भी कर लो। कोई बात नही है। तुम अच्छा कर रहे हो। चालू रहो। मज़ा आ रहा है।

मैंने दीदी को अपने दोनों हाथों से लपेट लिया। दीदी ने भी अपनी टांगों को मेरे ऊपर से लपेट कर अपने हाथों से मेरी पीठ को लपेट लिया। अब हम दोनों एक दुसरे से बिलकूल गुथे हुए था। मैंने अपनी कमर धीरे से ऊपर उठाया इस से मेरा लिंग दीदी के बुर से थोड़ा बाहर आया। मैंने फिर अपना कमर को नीचे किया। इस से मेरा लिंग दीदी के बुर में पूरी तरह से समां गया। इस बार दीदी लगभग चीख उठी।

अब मैंने दीदी की चीखूं और दर्द पर ध्यान देना बंद कर दिया। और उनको पुरी प्रेम से चोदना शुरू किया। पहले नौ - दस धक्के में तो दीदी हर धक्के पर कराही । लेकिन दस धक्के के आड़ उनकी बुर चौडी हो गई॥ तीस पैंतीस धक्के के बाद तो उनका बुर पूरी तरह से फैल गया। अब उनको आनंद आने लगा था। अब वो मेरे चुतद पर हाथ रख के मेरे धक्के को और भी जोर दे रही थी। चूँकि थोडी देर पहले ही ढेर सारा माल निकल गया था इस लिए जल्दी माल निकालने वाला तो था नहीं. मै उनकी चुदाई करते करते थक गया। करीब बीस मिनट तक उनकी बुर चुदाई के बाद भी मेरा माल नही निकल रहा था।

दीदी बोली - थोड़ा रुक जाओ।

मैंने दीदी के बुर में अपना सात इंच का लिंग डाले हुए ही थोडी देर के लिए रुक गया। मेरी साँसे तेज़ चल रही थी। दीदी भी थक गई थी। मैंने उनकी चूची को मुंह में भर कर चुसना शुरू किया। इस बार मुझे शरारत सूझी। मैंने उनकी चूची में दांत गडा दिए। वो चीखी.

बोली- क्या करते हो?

फिर मैंने उनके ओठों को अपने मुंह में भर लिया। दो मिनट के विश्राम के बाद मैंने अपने कमर को फिर से हरकत में लाया। इस बार मेरी स्पीड काफ़ी बढ़ गई। दीदी का पूरा बदन मेरे धक्के के साथ आगे पीछे होने लगा।

दीदी बोली- अब छोड़ दो गुड्डू। मेरा माल निकल गया।

मैंने उनकी चुदाई जारी रखते हुए कहा- रुको न.अब मेरा भी निकल जाएगा।

चालीस -पचास धक्के के बाद में लिंग के मुंह से गंगा जमुना की धारा बह निकली . सारी धारा दीदी के बुर के विशाल कुएं में समा गयी । एक बूंद भी बाहर नही आई। बीस मिनट तक हम दोनों को कुछ भी होश नही था। मै उसी तरह से उनके बदन पे पड़ा रहा।

बीस मिनट के बाद वो बोली -गुड्डू , तुम ठीक तो हो न?

मैंने बोला -हाँ।

दीदी - कैसा लगा बुर की चुदाई कर के?

मैंने - मज़ा आ गया।

दीदी- और करोगे?

मैंने - अब मेरा माल नही निकलेगा।

दीदी हँसी और बोली- धत पगले। माल भी कहीं ख़तम होता है। रुको में तुम्हारे लिए कॉफ़ी बना के लाती हूँ।

दीदी नंगे बदन ही किचन गई और कॉफ़ी बना कर लायी। कॉफ़ी पीने के बाद फिर से ताजगी छा गई। दीदी के जिस्म देख देख के मुझे फिर गर्मी चढ़ने लगी।

दीदी ने मेरे लिंग को पकड़ कर कहा- क्या हाल है जनाब का?

मैंने कहा - क्यों दीदी , फिर से एक राउंड हो जाए?

दीदी - क्यों नही। इस बार आराम से करेंगे।

दीदी बिस्तर पर लेट गई। पहले तो मैंने उनके बुर को चाट चाट के पनिया दिया। मेरा लिंग महाराज बड़ी ही मुश्किल से दुबारा तैयार हुआ। लेकिन जैसे ही मैंने उनको दीदी के बुर देवी से भेंट करवाया वो तुंरत ही जाग गए। सुबह के चार बज गए थे। उसी समय अपने लिंग महाराज को दीदी के बुर देवी कह प्रवेश कराया। पूरे पैंतालिस मिनट तक दीदी को चोदता रह। दीदी की बुर ने पाँच छः बार पानी छोड़ दिया।

वो मुझसे बार बार कहती रही -गुड्डू छोड़ दो। अब नही। कल करना।

लेकिन मैंने कहा नही दीदी अब तो जब तक मेरा माल नही निकल जाता तब तक तुम्हारे बुर का कल्याण नही है।

पैंतालिस मिनट के बाद मेरे लिंग महाराज ने जो धारा निकाली तो मेरे तो जैसे प्राण ही निकल गए। जब दीदी को पता चला की मेरा माल निकल गया है तो जैसे तैसे अपने ऊपर से मुझे हटाई और अपने कपड़े लिए खड़ी हो गई। में तो बिलकूल निढाल हो बिस्तर पे पड़ा रहा . दीदी ने मेरे ऊपर कम्बल रखा और बिना कपड़े पहने ही हाथ में कपड़े लिए अपने कमरे की तरफ़ चली गई . आँख खुली तो दिन के बारह बज चुके थे . में अभी भी नंगा सिर्फ़ कम्बल ओढे हुए पड़ा था . किसी तरह उठ कर कपड़े पहना और बाहर आया . देखा दीदी किचेन में है .

मुझे देख कर मुस्कुराई और बोली - एक रात में ही ये हाल है , जीजाजी का आर्डर सुना है ना पूरे एक महीने रहना है । हां हां हां हां !!!!

इस प्रकार दीदी की चुदाई से ही मेरा यौवन का प्रारम्भ हुआ . मैं वहां एक महीने से भी अधिक रुका जब तक जीजा जी नही आ गए। इस एक महीने में कोई भी रात मैंने बिना उनकी चुदाई के नही गुजारी। दीदी ने मुझसे इतनी अधिक प्रैक्टिस करवाई की अब एक रात में पाँच बार भी उनकी बुर की चुदाई कर सकता था। उन्होंने मुझे अपनी गांड के दर्शन भी कई बार करवाई। कई बार दिन में हम दोनों ने साथ स्नान भी किया।

आख़िर एक दिन जीजाजी भी आ गए। जब रात हुई और जीजाजी और दीदी अपने कमरे में गए तो थोडी ही देर में दीदी की चीख और कराहने की आवाज़ ज़ोर ज़ोर से मेरे कमरे में आने लगी। में तो डर गया। लगता है की दीदी की चुदाई का भेद खुल गया है और जीजा जी दीदी की पिटाई कर रहे हैं। रात दस बजे से सुबह चार बजे तक दीदी की कराहने की आवाज़ आती रही।

सुबह जैसे ही दीदी से मुलाकात हुई तो मैंने पुछा - कल रात को जीजाजी ने तुम्हे पीटा? कल रात भर तुम्हारे कराहने की आवाज़ आती रही।

दीदी बोली- धत पगले। वो तो रात भर मेरी चुदाई कर रहे थे। चार महीने की गर्मी थी इसलिए कुछ ज्यादा ही उछल कूद हो रही थी।

मैंने कहा- दीदी अब में जाऊँगा।

दीदी ने कहा - कब? मैंने कहा - आज रात ही निकल जाऊँगा।

दीदी बोली- ठीक है। चल रात की खुमारी तो निकाल दे मेरी।

मैंने कहा - जीजाजी घर पे हैं। वो जान जायेंगे तो।

दीदी बोली- वो रात को इतनी बेयर पी चुके हैं की दोपहर से पहले नही उठने वाले।

दीदी को मैंने अपने कमरे में ले जा कर इतनी चुदाई की की आने वाले दो - तीन महीने तक मुझे मुठ मारने की भी जरूरत नही हुई। जीजा जी ने जब दीदी को आवाज़ लगायी तभी दीदी को मुझसे मुक्ति मिली। आखिरी बार मैंने दीदी के बुर को किस किया और वो अपने कपड़े पहनते हुए अपने कमरे में जीजा जी से चुदवाने फिर चली गई। उसी रात को मैंने अपने घर की ट्रेन पकड़ ली

भाई ने बताया part II

मैंने भइया से पूछा, "भइया, लंड इतना मोटा होता है?"
भइया ने कहा, "नहीं, आयुषी हर किसी का इतना मोटा नहीं होता है।"
मैंने फिर भइया से पूछा, "इसका, सुपाड़ा इतना मोटा है, ये चूत में अन्दर कैसे जाता होगा?"
भइया ने कहा, "अभी थोड़ी देर में पता चल जाएगा, ये अन्दर कैसे जाता है।"
और भइया ने इतना कहकर अपनी चड्डी उतार दी अब वो मेरे सामने बिल्कुल नंगे थे। उनका लंड किसी लोहे की रोड की तरह तना हुआ खड़ा था। मेरी नज़र उससे हट ही नहीं रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे मैं कोई अजूबा देख रही हूँ और क्यूँ ना लगे, लंड पहली बार जो देख रही थी। खामोशी को तोड़ते हुए भइया ने मुझे घुटनों पर बैठने को कहा और मैं बैठ गई।
फ़िर भइया मेरे पास आए और अपने लंड को मेरे होठों से लगाते हुए बोले, "इसे अपने मुंह में डालो।"
मैंने कहा, "नहीं, भइया ये बहुत मोटा है मेरे मुँह में नहीं जाएगा।"
भइया को अब थोड़ा गुस्सा आ गया और गुस्से में बोले, "मुँह में लेती है या सीधा तेरी चूत में डालूँ?"
मैंने कहा, "नहीं भइया चूत में नहीं, वो फट जायेगी, मैं मुँह में लेती हूँ।"
ऐसा कहकर मैंने उनका लंड अपने मुँह में लिया। लंड का सुपाडा बड़ा होने के कारण मुँह में फँस रहा था और मैं लंड को मुँह में लिए उसे चूस नहीं पा रही थी लेकिन भइया के इरादे कुछ और थे उन्होंने मेरे बाल पकड़े और मेरे मुँह में धक्के देने लगे। मैं कुछ नहीं बोल पा रही थी और मेरी आँखों से आँसू निकलने लगे थे। भइया पूरी तरह से वहशी हो गए थे और मेरे बालों को खीचते हुए मेरी मुँह को चूत समझकर चोदने लगे थे।
मेरी हालत बहुत ख़राब हो रही थी और आँसू भी लगातार बह रहे थे लेकिन भइया के धक्के लगातार तेज़ हो रहे थे। वो मेरे बालों को इस तरह खींच रहे थे जैसे मैं उनकी बहन नहीं कोई रण्डी हूँ। भइया का मुँह लाल पड़ गया था और उनके मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थीं। मैं अपनी हालत से सचमुच में रोने लगी थी लेकिन उनको मेरे ऊपर जरा भी तरस नहीं आ रहा था। वो तो किसी जानवर की तरह मेरे मुंह को चोदते जा रहे थे, कभी वो मेरे बाल खींचते तो कभी मेरे गाल पर चपत लगाते, वो इतने वहशी हो गए थे कि मुझे उनसे डर लगने लगा था।
मैं मन ही मन भगवान से प्रार्थना कर रही थी, मुझे बचा लो। और भगवान ने मेरी सुन ली, भइया शायद झड़ने वाले थे इसीलिए उन्होंने अपना लंड मेरे मुँह से बाहर निकाल लिया। मैंने एक गहरी साँस ली और सिर पकड़कर बैठ गई। भइया बोले, "आयुषी ज़रा अपनी जीभ से मेरे लंड को चाटकर इसका पानी निकाल दो।"
मैंने भइया के लंड की तरफ़ देखा वो अब भी तना हुआ खड़ा था, उनके लंड को देखकर मेरा शरीर गरमा गया, मैं घुटनों पर चलती हुई भइया के लंड के पास पहुँची और उसे हाथ में लेकर जीभ से चाटने लगी। मेरे चाटने से भइया की सिसकारियाँ निकलने लगीं और वो बोलने लगे, "शाबाश, मेरी प्यारी बहना ! चाट और चाट, अभी रसमलाई निकलेगी उसे भी चाटना।"
इतना कहकर भइया ने एक जोर की अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह.......... के साथ वीर्य मेरे मुंह पर छोड़ना शुरू कर दिया, मेरा मुंह पूरी तरह से उनके वीर्य से नहा गया, कुछ मेरे होठों पर भी रह गया जिसे मैंने जीभ से चाट लिया और उसके बाद भइया के लंड को भी चाटकर साफ़ कर दिया। 
भइया ने मुझे खड़ा किया और तौलिए से मेरा मुंह साफ़ कर होठों से होंठ मिलाकर चूमना शुरू कर दिया। ५ मिनट के उस किस ने मेरे सेक्स को चरम पर पंहुचा दिया और मेरी चूत लंड खाने के लिए बेकरार होने लगी। भइया शायद इस बात को समझ गए थे इसलिए उन्होंने किस करते हुए ही मेरी नाईटी उठाकर अपना एक हाथ मेरी चूत पर ले गए और उसे सहलाने लगे।
मेरी बेकरारी भइया का स्पर्श अपनी चूत पर पाकर और बढ़ गई और मैं भइया से कहने लगी, "भइया, अब और सहन नहीं होता है, मेरी चूत में अपना लंड डालो प्लीज़ मुझे चोदो और बताओ चुदाई क्या है?"
भइया बोले, "आयुषी, चिंता मत करो पूरी रात अपनी है आज मैं तुझे वो मज़ा दूँगा जिसे तू जिंदगी भर याद रखेगी।"
ऐसा कहकर भइया ने अपनी एक उँगली मेरी चूत में डाल दी। मैं उनकी उँगली को चूत में पाकर कसमसा गई और सिसकारियाँ लेने लगी। भइया अपनी उँगली को मेरी चूत में अन्दर बाहर करने लगे उन्हें शायद मेरी नाईटी से दिक्कत हो रही थी इसलिए उन्होंने चूत में उँगली डालते हुए ही मुझसे नाईटी को उतारने के लिए कहा और मैंने किसी आज्ञाकारी बच्चे की तरह उनकी बात मानकर अपनी नाईटी को सिर के ऊपर से उतारकर फ़ेंक दिया।
भइया की उँगली मुझे पूरा आनंद दे रही थी और मैं सिसकारियाँ लेकर मज़ा ले रही थी। मुझे मज़ा लेते देख भइया ने अपनी दूसरी ऊँगली भी मेरी चूत में डाल दी। और स्पीड से अन्दर बाहर करने लगे साथ ही अपने अंगूठे से मेरी चूत के ऊपरी हिस्से को रगड़ने लगे। उनकी उँगलियाँ भी मुझे इतना मज़ा दे रही थी कि मुझे जन्नत का अनुभव हो रहा था, मुझे लग रहा था कि मैं आसमान में कहीं उड़ रही हूँ। भइया की उँगली-चुदाई ने मुझे एक बार फिर झड़ने के लिए मजबूर कर दिया, मेरी चूत ने अपना पानी छोड़ दिया और मैं एक बार फिर निढाल होकर फर्श पर गिरने लगी लेकिन इस बार भइया ने मुझे अपनी बाँहों में थाम लिया।
भइया ने मुझे उठाकर बेड पर लिटा दिया और मुझे चूमने लगे, भइया का एक हाथ अभी भी मेरी चूत को सहला रहा था। उनका ध्यान पहली बार मेरे वक्षस्थल पर गया उन्होंने अपना मुँह मेरे ३४ साइज़ की चूचियों पर रख दिया और बुरी तरह से मेरी घुंडियों को चूसने लगे, उनका हाथ बराबर मेरी चूत को सहला रहा था।
भइया काफी एक्सपर्ट थे वो अच्छी तरह जानते थे कि लड़की को कैसे गरम किया जाता है वो ये सब मुझे फिर से गरम करने के लिए कर रहे थे और वो इसमे सफल भी हो रहे थे क्योंकि धीरे-धीरे मेरे अन्दर सेक्स फिर से जागने लगा था। वो मेरी चूचियों को छोड़कर मेरी कमर पर आ गए, नाभि के आस-पास चुम्बन देते हुए वो सीधे मेरी चूत पर पहुँच गए और उन्होंने अपने होंठ मेरी चूत के होंठो पर रख दिए। उनके होठों का एहसास पाकर मेरे मुंह से सिसकारी निकल पड़ी, भइया ने मेरी चूत चाटना शुरू कर दिया। 
 

हाय........... मैं क्या बताऊँ आपको उस समय मुझे ऐसा लगा मानो स्वयं कामदेवता मेरी चूत को चाट रहे थे और मेरी नस-नस में सुधा भर रहे थे, मेरी चूत के होंठ सेक्स की प्रबलता से हिलने लगे थे, मैं भइया से लगभग भीख माँगते हुए बोली," प्लीज़ भइया अपना लंड डालो नहीं तो मैं मर जाउँगी।"
भइया ने मुझसे कहा, "बस मेरी जान अब तुझे और इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा।"
ऐसा कहकर उन्होंने मेरी दोनों टाँगे उठाकर अपने कंधे पर रखा और अपने लंड का सुपाडा मेरी चूत पर रगड़ने लगे, लंड को अपनी चूत पर पाकर मैं तड़प उठी और भइया से गाली देती हुई बोली," बहनचोद क्यों तड़पा रहा है, डालता क्यों नहीं?"
मेरी बात सुनकर भइया ने जोश में एक जोरदार धक्का दिया और उनका आधा लंड मेरी चूत चला गया। मैं दर्द के मारे छटपटाते हुए भइया से लंड को बाहर निकालने के लिए बोलने लगी तो भइया ने जोरदार चांटा मेरे गाल पर रसीद कर दिया और बोले, "साली, घंटे भर से चिल्ला रही थी डालो-२ ! अब डाल दिया तो चूत फट गई।"
एक और जोरदार धक्के के साथ भइया ने अपना पूरा लंड मेरी चूत में पेल दिया। मैं बुरी तरह से हाथ-पैर पटक कर भइया की कैद से छूटने की कोशिश करने लगी और चिल्लाने लगी, "भइया, प्लीज़ मैं मर जाउँगी, मेरी चूत फट जाएगी अपना लंड बाहर निकालो।"
लेकिन भइया ने मेरी अनसुनी करते हुए एक और तेज़ धक्का दिया तो मेरे मुंह से चीख निकल गई। मेरी चीख सुनकर भइया ने मेरा मुँह अपने एक हाथ से बंद कर दिया और धक्के देने शुरू कर दिए। ५ मिनट तक भइया के जोरदार धक्के सहने के बाद मुझे मज़ा आने लगा और मेरे मुँह की चीखें कामुक सिसकारियों में बदलने लगीं। अब मैं भइया को अपनी कमर उचका कर सहयोग करने लगी, भइया के धक्के लगातार तेज़ होते जा रहे थे और मेरी सिसकारियाँ और कामुक होती जा रहीं थीं। १० मिनट के बाद मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया लेकिन भइया अभी भी नहीं झड़े थे और धक्के मार-मार कर मेरी चूत का पूरा आनंद ले रहे थे।
चुदाई क्या होती है, चुदते समय मुझे मालूम हो गया, जितना मज़ा चुदाई में है उतना किसी और चीज़ में नहीं। भइया के धक्कों की रफ़्तार शताब्दी एक्सप्रेस को भी मात कर रही थी और मैं कामुक अंदाज़ में भइया के लंड की तारीफ़ कर रही थी। "भइया, तुम्हारे लंड में बहुत दम है, मोमबत्ती का मज़ा इसके सामने कुछ नहीं, प्लीज़ भइया आज मुझे जी भर चोदो, मेरी चूत की प्यास को ठंडा कर दो।"
भइया ने मेरी बात का जवाब मुंह से ना देते हुए अपने लंड से दिया, धक्कों की गति को दोगुना करते हुए भइया ने मेरी रेल बना दी, कुछ देर के बाद मुझे महसूस हुआ की मेरी चूत में कुछ गरम-गरम गिर रहा है, मैं समझ गई कि यह भइया का वीर्य है और उनके साथ मेरी चूत ने भी एक बार फिर पानी छोड़ दिया और इस तरह मेरी पहली चुदाई पूरी हुई।
भइया मेरी चूत में ही लंड डाले हुए मेरे ऊपर लेट गए। कुछ देर आराम करने के बाद मैंने किचन में जाकर चाय बनाई और हम दोनों बैठकर चाय पी, इस दौरान हम दोनों पूरी तरह से नंगे ही रहे। रात के ३ बजने के बाद मैंने भइया से सोने के लिए कहा तो भइया ने एक बार फिर चुदाई करने की इच्छा ज़ाहिर की। मैं भी राजी हो गई और भइया ने इस बार मुझे फर्श पर कुतिया बनाकर चोदा उसके बाद हम दोनों नंगे ही सो गए।
सुबह ६ बजे उठकर मैं जल्दी-जल्दी तैयार हुई और पौने सात बजे भइया को उठाया तो मुझे काली टॉप और काली लॉन्ग स्कर्ट में देखकर भइया का लंड एक बार फिर खड़ा हो गया और उन्होंने केवल मेरी पैंटी उतारकर किचन में दीवार के सहारे ही चोद डाला। भइया ने मुझे परीक्षा-केन्द्र पर छोड़ा और परीक्षा देकर जब मैं लौटी तो मम्मी आ चुकी थी। इसके बाद आज तक मुझे कभी मौका नहीं मिला कि मैं भइया से चुदाऊँ हालाँकि आज मेरी शादी हो चुकी है तो मेरी चुदाई हर रात होती है लेकिन भइया के लंड के लिए मैं आज भी बेकरार हूँ।
 

भाई ने बताया

मेरे नंगे जिस्म का एहसास जब भैया को हुआ तो उनका लंड खड़ा हो गया जिसका एहसास मुझे मेरी कमर पर होने लगा। मैं एकदम उनसे अलग हुई और उनसे जाने को कहा। लेकिन भैया एकटक होकर देखते रहे। मोमबत्ती की मद्धिम रोशनी में उनको मेरे जिस्म के स्पष्ट दर्शन हो रहे थे। उनकी आँखों में वासना उतरती नज़र आने लगी। उनके इस तरह देखने से मेरा जिस्म भी गरम होने लगा और मैं मन ही मन अपनी चुदाई के सपने देखने लगी। मैं नज़रें नीची कर ख्यालों में उनके लंड को अपनी चूत में महसूस करने लगी। इतना सोचने से ही मुझे महसूस हुआ कि मेरी पैंटी गीली हो चुकी है। मैंने नज़र उठाकर भइया कि तरफ़ देखा तो चौंक गई। वो जा चुके थे और मेरी चुदाई के सपने पल भर में टूट चुके थे।
रात के १२.०० बज चुके थे। मैं अपने बिस्तर पर लेटी हुई थी लेकिन अब मुझे नींद नहीं आ रही थी। भइया अभी भी हॉल में टी.वी. देख रहे थे। मेरा जिस्म अभी भी गरम था और चुदाई के पहले एहसास ने मेरे रोम-रोम में सेक्स भर दिया था। मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूँ?
यही सोचते-सोचते कब मेरा हाथ मेरी पैंटी में चला गया पता ही नहीं चला। अब मेरी उँगलियाँ मेरी चूत के साथ खेल रहीं थीं। मैं अपनी उँगलियों से चुदाई करके अपने आपको संतुष्ट करने लगी। लेकिन उँगलियों से मुझे कुछ खास मज़ा नहीं आ रहा था इसलिए मैं किसी मोटी चीज़ की तलाश में अपने बिस्तर से उठी। मैंने मोमबत्ती के पैकेट में से एक नई मोमबत्ती ली और अपने रूम में आ गई। रूम में अभी भी मोमबत्ती जल रही थी।
मैंने अपनी पैंटी उतार कर फेंक दी, अब मैं सिर्फ़ नाईटी पहने थी उसके नीचे ना तो ब्रा थी ना ही पैंटी। मैंने अपनी एक टांग टेबल पर रखी और दीवार के सहारे स्थिति बनाकर अपनी नाईटी ऊपर कर मोमबत्ती को अपनी चूत में डालने लगी। मोमबत्ती काफी मोटी थी और मेरी चूत बिल्कुल कुंवारी थी इसलिए मोमबत्ती अन्दर नहीं जा रही थी। लेकिन मेरे ऊपर तो चुदाई का भूत सवार था सो मोमबत्ती को जबरदस्ती अपनी चूत में पेल दिया।
मोमबत्ती के अन्दर जाने से मुझे काफी दर्द हुआ और मेरे ना चाहते हुए भी एक घुटी सी चीख मेरे मुंह से निकल गई। दो मिनट तक मोमबत्ती को अपनी चूत में डाले मैं वैसे ही खड़ी रही। फिर मैंने मोमबत्ती को अन्दर-बाहर करना शुरू किया। अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह, उह्ह्ह्ह्ह्ह ................. मेरे मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं, मुझे मोमबत्ती से चुदाई करने में मज़ा आने लगा।
मैं कल्पनाओं में खोई हुई मोमबत्ती को सुनील भइया का लंड समझने लगी और बड़बड़ाने लगी 'हाँ............ सुनील भइया, जोर से डालो अपना लंड, आज मेरी प्यास बुझा दो, जाने कितने दिनों से प्यासी है मेरी चूत आज इसको जी भर के चोदो और अपने लंड की ताकत से इसके दो टुकड़े कर दो, फाड़ दो, हाँ...... फाड़ दो....... मेरी चूत को। अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह, उम्म्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह................. मेरी सिसकारियाँ तेज़ होती जा रही थीं।
अब मुझे मोमबत्ती से चुदाई करने में अत्यन्त मज़ा आ रहा था। मेरा हाथ तेज़ गति से मोमबत्ती को मेरी चूत में पेल रहा था। मैं मदमस्त होकर पूरा आनंद ले रही थी। मैं अपने चरम पर पहुँच चुकी थी। मेरे शरीर से पसीना आने लगा था और मेरी टाँगे काँपने लगी थीं। मेरा इस स्थिति में खड़ा होना मुश्किल हो रहा था लेकिन मुझे इस स्थिति में बहुत मज़ा आ रहा था इसलिए मैं अपनी स्थिति बदलना नहीं चाह रही थी। मेरा हाथ मुझे पूरी तरह से संतुष्ट करने के लिए बहुत तेज़ गति से चलने लगा। आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह,................. उह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह,.............उम्म्म्म्ह्ह्ह्ह............ और आखिरकार वो पल आ ही गया, मेरा शरीर पूरी तरह जकड़ने लगा, अब मैं फर्श पर गिर पड़ी, अपनी दोनों टाँगे फैलाकर मोमबत्ती को फिर से डालने लगी और एक तेज़ आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह के साथ मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया जो फर्श पर फैल गया। अब मैं शांत हो चुकी थी, मेरी चूत की प्यास काफी हद तक बुझ चुकी थी। लेकिन मेरी असली चुदाई तो अभी बाकी थी।
सुनील भइया दरवाज़े पर खड़े थे। उनको देखकर मेरे होश उड़ गए। मैं फर्श से उठकर खड़ी हो गई और भइया को देखने लगी। भइया रूम में अन्दर आ गए और उन्होंने अपनी टी-शर्ट व हाफ-पैंट उतार दिया, अब वो सिर्फ़ अपनी फ्रेंची चड्डी में मेरे सामने थे जिसमे उनका तना हुआ लंड साफ़ दिखाई दे रहा था। वो पास आए और अपनी चड्डी में से अपना लंड निकालकर मेरे हाथ में रखकर बोले, "आयुषी, जरा चेक करो ये मोमबत्ती से मोटा है या नहीं?" उनके लंड को देखकर मेरी आँखें फटी की फटी रह गई। लंड वाकई में बहुत मोटा था और उसका सुपाड़ा तो कुछ ज्यादा ही मोटा था।

मेरा परिवार

मैं एक 25 साल खूबसूरत आंड सेक्शी औरत हून। मेरा हज़्बेंड मुझ से पाँच साल बरा है और भो इंडस्ट्रियलिस्ट. भो एक दम पागल आदमी है एर हम एक दूसरे के साथ बहुत कम मिल पाते है. हमारा अभी तक कोई भी बच्चा नही हुआ है. सुरू के दो टीन साल मे हुमलोगो की सेक्षलिफे बहुत ही अक्च्छा था. उसके बाद वो काम के चक्कर मे बहुत फँस गया और हम ने किटी पार्टी और लॅडीस पार्ट जाय्न कर ली. इन किटी पार्टी और लॅडीस पार्टी मे सिर्फ़ सराब, ब्लू फिल्म चलती और ओर्तों मे चूत चूमना और चूत चाटना होती थी. मैं इस्मी बहुत खुस थी. एक बार होली पर मेरा आदमी अपने काम से बाहर गया हुआ था. मैने लॅडीस' किटी पार्टी मे चला गई . उस दिन किटी पार्टी म तरफे बाहित सराब पिया गया और हम लोग ने ताश भी खेले. फिर हम औरूटों ने एक हिन्दी प्रोनो सिनिमा भी देखी, जो की बहुत ही गरम था. उस के बाद हम और्ताओं ने चुम्मा और छूट छाती भी की, और एह सब रत के तीन बजे तक चलता रहा. हम ने बाहित सराब पीली थी और हमे घर तक हमारी एक सहेलिी अपने कार मे चोर गयी. घर पर मेरा भाई, रमेश ने मुझे सहारा दे कर ह्यूम हमरे बेडरूम तक पहुचेया. मई ने इतनी सराब पी रखिी थी की मई ठीक तरह से चल भी नही पा रही थी. आज किटी पार्टी मे गरम सिनिमा देख कर बहुत ही गरम हो गयी थी. मेरी चूंची बहुत फराक रहा था और मेरे छूट से पानी निकल रहा जीसी की मेरे पनटी तक भीग गयी थे. जैसे ही मेरा भाई ने मुझ को सहारा देकर मेरे बेडरूम तक ले आया मेरा मान उसीसे छूट छोड़यने कर उठी. मेरी छूट फ़र्क उठी. मेरा भाई, रमेश एक 20 साल का हटता कटा नौ जवान था. मई अपने बेडरूम मे आ कर एक कुर्सी पर बैठ गयी और जान बुझ कर अपना पल्लू गिरा दिया, जिसे की रमेश मेरी चूंच्चे को देख सके. मई उस दिन अक बहुत ही छोटा ब्लाउस पहन रखी थी और उसका गला बहुत हे लो कट था. रमेश का लंड मेरी चूंची देख कर ढेरे ढेरे खरा होने लगा और उसको देख कर मई और पागल हो गई. मुझको लगा की मेरा प्लान कम कर रहा है. उसका पंत तम्ब्ुऊ के तराहा तनने लगा. मई ढेरे से मुस्कुरई. मई ने हाथ से पाने बाल को पेचए किया. मई जान बुझ कर उसको अपनी चूंची की जालक दिखना कहती त्ीी. मई ने अपना कंधूं को और पेची ले गया जीसी से की मेरी चूंची और बाहर की तरफ निकल गया. उसका पंत ुआर उठने लगा और मई मान ही मान मुस्करा रही थी एर सोच राज़ी थी की मेरा कम बन जायगा. हाउ को उसके लंड की उठान को देख कर लग रहा था की थोरी ही देर मे मई उसकी बाहों मे घुस जौंगी और उसका लंड मेरी छूट अची तराहा से कस कर छोड़ेगा. मई ने अपने भाई से बोले से बोले की जाऊ "दो ग्लास और स्कॉच के बोतल हमारे कमरी से ले आऊ". मई ने रमेश से बोले इसको ले लो और पी जाओ. उसने हमारी तरफ पहले देखा और एक ही झटके सारी सराब पी लिया. मई ने भी पानी ग्लास खाली कर दिया. मई ने उसकी आँखूं झँकती हुए ढेरे से अपन ब्लाउस को उतार दिया. मई ने उसकी आँखूं मे बसना के डोरे देखने लगी और रमेश हम को घूर रहा था. मई ने उसकी पंत की तरफ देख रही थी, जो अब तक बहुत ही फूल चक्का था. मई समझ गयी की उसका लंड अब बिल्कुल ही खरा हो गया है और छोड़ने के लिए अब टायर है. भो मेरी आधे नंगी जिस्म को बाहित अची तारेह से देख रहा था. मई उससे पूछी, "क्यों रमेश, "क्या सोच रहे हो.तुम्हरे साथ क्या होने वाला है?" बो कुछ ना बोल सका और बहुत ने घहबरा गया. मई ने ढेरे से उससे पूछी, "तुम्हारा लंड खड़ा हो गया है, है ना?" "मुझे पता है तुम भी मेरी छूट में अपना लंड घूसना चहेते हो". मेरे ज़बान से इतनी गंदी बात निकल तही मेरी छूट और गरमा गयी और ढेर सारा पानी निकाला. मेरी छूट उसकी लंड खाने के लिए फाफरने लगी. मेरे दीमक मे बस एक ही बात घूम रही थी, की कब रमेश का लंड मेरी छूट मे घूसेगा और ह्यूम ज़ोर ज़ोर से छोड़ेगा. मई अपने कप्रों को ढेरे ढेरे से खोलने लगी और एह देख कर रमेश का अनकहीन बाहर की निकालने लगी. मई ने ढेरे से अपनी सारी को उतेरी. मई ने अपनी पेटिकोट भी ढेरे से उतार फेंका और फिर पनटी भी ुआतर फेंकी. अब मई अपने भाई, रमेश, के सामने बिल्कुल नंगी हो कर हरी हो गयी. रमेश मुझको फटी आँखूं से देख रहा था. मेरी बाल साफा, भीगी छूट उसके आँखूं के सेम थी और बो उसके लंड तो लीलने के लिया बेताब होरही थी. मैने रमेश से ढेरे से पूछी, "ऑश रमेश? कब तक देखते रहोगे? आओ मेरे पास आओ, और मुझे छोड़ू. धेक नही रहे हो मई कब से अपनी छूट खोले चुदसी खरी हूँ. आओ पास आओ और अपने मोटे लंड से मेरी छूट को खूब अची तारहा से रगर कर छोड़ो." मेरे इश्स बात को सुन कर बो हरकत मे आ गया. बो मेरे सेम अपने काप्रून को उतरने लगा. उसने पहले अपना शर्ट को उतरा. फिर उसने अपना चढ़ी भी ढेरे से उतार फेंका. चढ़ी उतार ते ही उसका लंड मेरी अनोखूं के सामने आ गया. उसका लंड इस समय बिल्कुल खरा था और छोड़ने की बेताब हो कर झूम रहा था. मई उसके लंड को बरी बरी आँखूं से घूर रही थी. उसका लंड मेरे पति के लंड से जाड़ा बरा और मोटा था. मई उसका लंड देख कर घबरा गयी, लेकिन मेरी छूट उसके लंड को खाने के लिई फरफारने लगी. मई अपने कुर्सी से यूटा कर उसके पास गाने लगी, लेकिन मेरे पैर लरखरा गये. मई गिरने लगी और रमेश ने आ कर हुमको छिपता कर सम्हल लिया. एक झटके मे रमेश का हाथ मेरे चूंची पर था. उसने मेरे एक चूंची को अपने मूह के अंदर लेकर चूसने लगा. मई बहुत सराब पन के कारण खरी नही हो पा रही थे. मई फर्श पर गिर पारी. रमेश मुझको फॅट से पाकर लिया और हम दोनो कार्पेट पर गिर गये. रमेश का हाथ मेरे चूंची पर था और रमेश वेसए ही पर रहा. औब मुझ से बर्दस्त नही हो रहा था. मई ढेरे से रमेश से कहा, "रमेश मेरे चूंची तो दब्ाओ, खूब ज़ोर से दब्ाओ" "लनको अपने मूह मे लेके चूसो, इनसे खूब खेलो". इतना सुनते ही रमेश हमारे उपर टूट परा और मेरे छूनची से खिलबर करने लगा. मैने अपना दाहिना तरफ का दूध उसके मूह पर लगा दिया और कहा लो इस अपने मूह मे लेके खूब ज़ोर से चूसो. रमेश ने मेरा दूध को लेकर चूसने लगा. मई अपनी कांवासना मे पागल हो रही थी. मेरे छूट से पानी निकल रहा था. मैने रमेश का स्राके बलपकड़ कर उसका मूह मेरी छूनची पर कनीच ली और खोब ज़ोर से दबा दिया. हू मेरे मेरी दोनो छूनची को बरी बरी से मसल रहा था और चूस रहा था. मई उसकी ढूढ़ चूसैई से पागल से हो गयी और उसका एक हाथ को पाकर कर अपनी छूट पर ले गयी. मेरे छूट को छूटे ही रमेश ने पहले मेरी झटों पर हाथ फिराया और अपनी बिचवाली उंगली को मेरे छूट मे घूसा दिया. रमेश अब मुझ को अपनी उंगली से छोड़ रहा था. अब मुझसे बर्दस्त नही हो रहा था, और मई अपने दोनो हाथों से रमेश का लंड पाकर लिया और उसको मसलने लगी. रमेश के मूह से शीए! शीए! की अबाज निकल रहा था. मैने रमेश का लंड पाकर कर उसका सुपरा निकल लिया और उस पर एक चुम्मा जर दिया. रमेश अब ज़ोर ज़ोर से मुज़ेः अपनी उंगली से छोड़ रहा था. माए रमेश का लंड अपना मूह मे ले के चूसने लगी और रमेश अपने लंड को मेरे मुहन ने ज़ोर ज़ोर से ठेलने लगा. थोरी देर के बाद मुझको लगा की रमेश अब झार जायगा और माए बोली रमेश "छोड़! छोड़! अपनी दीदी की मुहन को खूब ज़ोर ज़ोर से छोड़ और अपना माल अपने दीदी के मुहन मे गिरा दे. थोरी दे के बाद रमेश बोला ही दीदी मई झार रहा हूँ और उसने अपना सारा माल मेरे मुहन मे दल दिया. माए रमेश का लंड का माल पूरा पूरा का पी लिया. माए ढेरे से रमेश से पूछी "अपनी दीदी को छोड़ेगा? तेरे जीजा की बहुत याद आ रही है. मेरी छूट बहुत प्यासी हो रखी है. रमेश ने मेरे दोनो चूंचीयओ को पाकर कर बोला "दीदी अपनी छूट पिलाओ ना. पहले दीदी की छूट चूसूंगा फिर जी भर के छोड़ूँगा. माए रमेश का लंड अपने हाथो मे पाकर कर खेल रही थी और माए कही "तेरा लंड तो बहुत विशाल है रे". रमेश पूछा "आपको पसंद आया दीदी? उसका लंड पाकर कर माए बोली "यह तो बहुत प्यारा है. किसी भी लड़की को छोड़ कर मस्त कर देगा". माए चिट होकर चूटर के बाल लेती थी और अपनी तंगी फैला कर बोली "ले अपनी दीदी की छूट को प्यार कर. जी भर के पियो. पूरी रात पियो. रमेश मेरी छूट को जीव से चाटने लगा. हू मेरी छूट को पूरी अंडर तक छत रहा था , कभी कभी उसका जीव मेरी छूट की मटर दान कोभी छत लेता था या फिर अपने दंटू मे लेकर ढेरे ढेरे से काट लेता था. अपनी छूट चटाई से मे बिल्कुल पागल हो गयी और बर्बाराने लगी "आआआआआआःःःःःःःःःःःह्ह मेरे राजा भैया, बहुत मज़ा आ रहा है. चूसो, खूब ज़ोर से चूसो ओओओओओओओओओओओःःःःःःःःः ऊऊऊऊऊऊऊऊह्ह्ह्ह्ह्ह. मे उसका सिर पाकर कर उसके मूह मे अपने छूट को चूटर उछाल उछाल कर रगर रही थी. उसकी छूट चटाई से बिल्कुल पागल हो गयी और रमेश के मूह पर ही झार गयी. रमेश हुमारी छूट से निकले पूरा का पूरा पी गया. माए अभी भी बार्बरा रही थी, "ओह रमेश अब अपनी दीदी को छोड़ दे. अब नही रुका जा रहा. अपने लंड को मेरे छूट मे घूसा दे. पेल दे अपने लंड को मेरी छूट मे. प्लीज़ राजा, अब छोड़ो ना. रमेश मेरी तागू के बीच आ गया और अपने लंड का सुपरा मेरी छूट के मूह पे रख कर धक्का लगाने लगा, लेकिन उसका लंड फिसल रहा था. माए हंस पारी और बोली "साले अनारी बहँचोड़, छोड़ना आता नही, चला है दीदी को छोड़ने बहिँचोड़ कहीं का". मई उसका लंड को पाकर कर अपने छूट के मूह पर लगा दिया और बोली चल अब देर ना कर और अपनी दीदी को छोड़ छोड़ कर उसकी छूट की आग को ठंडा कर. चल मेरे भैया अब लगा ढाका, और उसका चूटर को अपने हाथ से खूब ज़ोर से दबा दिया और अपनी चूटर को उछाल कर रमेश का लंड अपनू छूट मे लेलिया. रमेश का लंड पूरा का पूरा मेरी छूट मे घुस गया. मई मस्ती मे आकर चिल्ला पारी आआआआआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ओओओओओःःःःःः ःःःआआआआआ. ही रमेश, बहुत अच्छे. पेलो मेरी छूट को, ज़ोर से पेलो. फाड़ दो मेरी छूट रानी को, आज सालों बाद इतनी हसीन चुदाई हो रही है इस छीनाल छूट रानी की. साली को लंड लेने का बहुत शौक था. छोड़ दो, पहाड़ दो आआआअहह. उूुुुउउइईईईईईईईईईईईईईई म्मीईईरररृिईईईईईईईईईई म्‍म्म्ममममआआआआयययययययययाआआअ म्माआर्रूऊओ ददाााआआआअक्ककककककककक्क्ीईईई ज्ज्ज्ज्ज्ूओर्र्र्र्र्ररर सीईए म्‍म्म्मीईररररीई ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल उूुउउन्न्ञन्ँद्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्दद्ड वववववाााल्लीी". रमएस का लंड बहुत मोटा था और हू मेरी छूट तो दो फांको मे फार रहा था. रमेश के लंड से छुड़वा के मई बिल्कुल सातवाने आसमान पर थी. मई अपनी टॅंगो को उठा कर रमेश के चूटर पर लॉक कर दिया और उसके कंदू को पाकर कर उसके लंड के धक्को को अपनी छूट मे मे खाने लगी. रमेश अपने धक्को के साथ साथ मेरे चूंची को भी पे रहा था. मेरी पूरा बदन रमेश की चुदाई से जल रहा था और मई अपनी चूटर उछाल उछाल कर उसके लंड अपनी छूट से खा रही थी. मई लंड खा कर पूरी तरह से मस्ता गयी और बोली रमेश आज पूरी रत तू मुझे इसी तरह से छोड़ता जा. तू बहुत अची तरह से छोड़ रहा है. तेरी चुदाई से मई और मेरी छूट बहुत खुश है. मुझे नही मालूम था की तू इतना अच्छा और मस्ती से छोड़ता है. रमेश बोल रहा था की है दीदी मई आज पूरी रत टिँको इसी तरह चिड़ूँगा. तुम्हारा छूट बहुत आचे है और इसमे बहुत मस्ती भरा हुआ है. अब एह छूट मेरा है और इसको खूब छोड़ूँगा. मई मस्ती से पागल हो रही थी और मेरी छूट पानी चॉर्ने वाला था. रमेश अब ज़ोर ज़ोर से मेरी छूट छोड़ रहा था. वॉ अब अपना लंड मेरी छूट से निकल कर पूरा का पूरा मेरी छूट मे जोरो से पेल रहा था. मेरी छूट अब तक दो बार पानी चोर चुकी थी. मई उसके हर धक्को का अनद उठा रही थी. हम दोनो अबतक पसीने ने नहा गयी थे. रमेश अब अपनी पूरी ताक़त के साथ मुझे छोड़ रहा था और मई सोच रही थी की काश आज की रत कभी कटम ना हो. थोरी देर बाद रमेश चिल्लाया की ही दीदी अब मेरा लंड पानी चॉर्ने वाला है. अब तुम छूट से मेरे लंड को कस कर पाकारो. इतना कहने के बाद रमेश ने करीब दस बारह धकके और लगाया और वॉ मेरिचूटके अंडर झार गया और मेरी चूंची पर मूह रख कर सो गया. रमेश का लंड बहुत ज़्यादा पानी चोर दिया था और वॉ मेरी छूट से बाहर आने लगा. मई उसको कस कर अपनी बनहूँ ने पाकर लिया और उसका मुँह चूमने लगी और मेरी छूट टसरी बार पानी चोर दिया. थोरी देर के बाद हम दोनो उठकर बातरूम मे जाकर अपने लॉर और छूट को साफ किया. रमेश का लंड अभी तक सख़्त था. मई उसका लंड हाथ मे ले कर सहलाने लगी और फिर उसके सुपरे पर एक चुम्मा दे दिया. फिर हम दोनो नंगे ही बिस्तर पर जा कर सो गये और एक-दूसरे के लंड और छूट से से खेलते रहे. थोरी देर के बाद रमेश का लंड फिर से करा होने लगा. रमेश का फॉर से खरा लंड देख कर मई फिर से ंसती मे आ गयी. मई उसके लंड को अपनी हठों से पाकर लिया और लंड का सुपरा खोल दिया. उस समय उसका सुपरा बहुत फूला हुआ था और बहुत ही चमक रहा था. मई झुक कर उसके सुपरे को लाके चुम्मा दिया और फिर उसको अपने मूह मे लेलिया. मई उसके सुपरे को मूह मे ले कर खूब मस्ती मे चूसना सुरू कर दिया और फिर धीरे धीरे पूरा का पूरा लंड मई अपने मूह मे ले कर चूसने लगी. थोरी देर बाद रमेश बोला दीदी, प्लीज़ मेरा लंड चोर दो अब मेरा पानी नेकालने वाला है. मई उसका लंड अपनी मूह से निकल दिये, कौंकी मई उसके मस्त लंड से फिर से छुड़ाना चाहती थी. मई रमेश से बोली, भाई अब तेरा लंड अच्छी तरह से खरा हो गया है और फिर से मेरी छूट मे घुसने के लिए टायर है. चल जल्दी से मेरे अप्पर आ और मेरी प्यासी छूट को अच्छी तरह से छोड़ दे. एह सुनते ही रमेश मेरे उपर आ गया और अपना पूरा की पूरा लंड मेरी छूट मे एक ही झटके मे पेल दिया. फिर रमेश ने मेरी छूट खूब अच्छी तरह से छोड़ा और मई उसकी चुदाई से निहाल हो गयी. उस रत मई और रमेश नंगे ही, एक दूसरे से लिप्त कर सो गये. उस दिन के बाद से मई और रमेश जब भी घर मे अकेले होते तो हम अपने कपारे नही पहनते और खूब जाम कर चुदाई करते. अगर कोई मर्द अपने खरे लंड से मेरी रसेली छूट को छोड़ना चटा है तो मेरे भाई से संपर्क कर सकता है. अगर कोई प्यासी छूट मेरे भाई से अपनी छूट की प्यास बुझाना चाहती हो या मेरे भाई से ए-माओल दोस्ती करना चाहती है तो मेरे भाई से उसके ए-मैल ईद पर संपर्क कर सकती है.

रिहर्सल में हिरोइन

हैलो रीडर्स, आई एम रोहित बैक वंस अगैन
आई एम २४ इयर्स ओल्ड एंड विद ए गुड फिज़िक & गुड मशीन साइज़। बात तब की है जब मैं कॉलेज में था एमए फ़ाइनल कर रहा था और कॉलेज में फेस्ट चल रहा था। निधि मेरी बहुत अच्छी दोस्त थी और मैं उसे दिल ही दिल में चाहता भी बहुत था लेकिन कभी कहने की हिम्मत नहीं होती थी। हम दोनों खूब साथ कॉलेज में रहते थे बात चीत करते थे लेकिन इससे ज़्यादा न कभी मैंने न कभी उसने ही कोई पहल करी। फेस्ट में हम दोनों एक्टर ऐक्ट्रेस का रोल कर रहे थे। नाटक शाम को ५ बजे होना था और हम १ बजे से ही रिहर्सल कर रहे थे। लगभग २ घंटा पहले मेक अप करके हम दोनों को थोड़ी देर डाइरेक्टर ने हमें एक ही कमरे में छोड़ दिया और डाइलोग बोल कर देखने को कहा। उसने एक आदिवासी की साड़ी पहनी थी और मैंने एक धोती और एक फटा हुआ बनियान पहना हुआ था क्योंकि मैं नाटक में एक मजदूर और वो मेरी बीवी का रोल कर रही थी।
नाटक की प्रक्टिस में हम दोनों को एक सीन में डांस करना था मैंने उसकी कमर में हाथ डाला और उसने मेरी कमर में हाथ डाला और हमने डांस करना शुरू किया। उसके बाद एक बेंच से टकरा कर वो थोडी सी लड़खड़ायी और उसकी साड़ी का पल्लू नीचे गिर गया। अचानक मेरी नज़र उसके बूब्स पर चली गई जो ब्लाउज़ का गला गहरा होने की वजह से साफ साफ दिखाई पड़ रहे थे। उसका रंग इतना गोरा था कि मानो दूध से भी सफ़ेद। साइज़ तो बस एक दम परफेक्ट। इतना परफेक्ट कि कोई भी देखे तो बस देखता ही रह जाए। शायद ३६-२६-३४ होगा। मेरी निगाह उसकी छाती से ही अटकी रह गई। तभी मैंने देख कि निधि अपने साड़ी का पल्लू उठाने की बजाय मेरी तरफ़ ही देखे जा रही है। मुझे लगा कि शायद ग्रीन सिग्नल मिल रहा है मैंने चेहरा ऊपर उठा कर उसके लिप्स पर किस करना शुरू कर दिया। उसने कोई विरोध नहीं किया। मैं किस और ज़्यादा डीप करता गया और फ़िर अपनी जीभ उसके मुंह मी दे दी और फ़िर उसके जीभ मेरे मुंह में भी आ गई। वो भी बहुत एन्जॉय कर रही थी।
मैंने मौका देखते हुए उसके बूब्स को दबाना शुरू कर दिया और ब्लाउस के ऊपर से ही पूरा मज़ा लेने के बाद मैंने ब्लाउज़ के अन्दर हाथ डालने की बजाय उसे पीछे से बांहों में भर कर उसकी गांड दबाने लगा। मैंने वो भी मुझे बिल्कुल मना करने की बजाय मेरा साथ दे रही थी मैंने अब देर न करते हुए उसकी साड़ी को उठाया और उसकी गोरी गोरी टांगो को देख कर मेरी आँख जैसे खुली की खुली ही रह गई। मैं उसकी टांगों को नीचे से चूमता हुआ ऊपर तक गया और उसकी काले रंग की पैंटी को किस किया और फ़िर देर न करते हुए उसकी पैंटी को उतार कर उसकी चूत को चाटना शुरू कर दिया। वो और ज़्यादा गरम होती जा रही थी।
मैंने अब देर न करते हुए अपनी धोती खोल कर अपने लंड को आज़ाद किया जिसका कच्छे में बुरा हाल हो रहा था। ८ इंच लंबा और ३ इंच मोटा लंड देखते ही उसके होश उड़ गए और वो कहने लगी कि नहीं रोहित प्लीज़ मेरे साथ वो मत करना मुझे बहुत दर्द होगा। मैंने कहा डरो मत मेरी जान मैं बिल्कुल दर्द नहीं करूँगा मगर वो मान ही नहीं रही थी। तो मैंने उसको कहा कि क्या तुम मेरे इस हथियार को अपने मुंह में ले सकती हो? उसने पहले तो मना किया पर फ़िर मेरे बार बार प्लीज़ कहने पर वो मान गई अब वो मेरे लंड को चूस रही थी और मैं मानो जन्नत में था। उससे खूबसूरत लड़की को मैंने अपनी ज़िंदगी में नहीं देखा था और वो मेरा लंड चूस रही थी।
थोड़ी देर के बाद वो पूरे मज़े के साथ चुसाई का काम करने लगी और उसे भी खूब मज़ा आ रहा था। अब मैंने उसको कहा कि जानू एक बार असली खेल भी खेल लेते हैं फ़िर बहुत मज़ा आएगा। वो फ़िर भी घबरा रही थी लेकिन अब की बार थोड़ा सा ही समझाने पर वो तुरंत मान गई और मैंने मुंह से ढेर सारा थूक निकाल कर अपने लंड और उसकी चूत पर लगाया और अपना काम धीरे धीरे शुरू किया। उसे बहुत दर्द हो रहा था। मगर अब वो कुछ बोल भी नहीं सकती थी क्योंकि अगर वो थोड़ी से भी आवाज़ बाहर निकालती तो बाहर से कोई भी आ सकता था। ऐसे में मैंने अपने होठ उसके होठों पे रख दिए और चुदाई कार्यक्रम शुरू कर दिया। थोड़ी देर में उसे भी मज़ा आने लगा और फ़िर लगभग १५ मिनट की मजेदार चुदाई के बाद हम दोनों ने अपना अपना पानी छोड़ दिया। उसके बाद तो मैंने लगभग हर हफ्ते उसे उसके घर पर जाकर चोदा।
वैसे वो आज भी मेरी बेस्ट फ्रेंड है पर अब उसकी शादी हो गई है। हालांकि शादी को २ महीने ही हुए हैं पर हो सकता है कि मेरा प्रोग्राम अभी भी चलता रहे।

मेरी सहेली मेरी सगी बहन part I

रीता के पति राहुल अभी तक घर नहीं आए थे। रीता ने अपना सामान रसोई में रखा और खाना बनाने की तैयारी करने लगी। उसे रह रह कर साहिल से चुदाई की याद आ रही थी। लगभग ७ बजे राहुल आया। काम भी पूरा हो चुका था.
राहुल ने आते ही पूछा - "कामिनी चली गयी क्या..."
"कामिनी की बड़ी चिंता है... कुछ गड़बड़ है क्या ?"
"नही है तो नही... पर तुम गड़बड़ करा दो न..."
"तुम्ही डरते हो.... वो तो बेचारी तुम पर मरती है..."
"फिर उसे आने दो...... इस बार तो पटा ही लूँगा उसे.."
"कामिनी तुमसे मिलकर गयी थी क्या ?"
"नही...ये बात नही है...उसका फ़ोन आया था..."
"हाँ वो दिन को चली गयी थी...."
"अब तो साहिल अकेला ही होगा.."
"हाँ अकेला ही है......"
"फिर तो आज हम दोनों की जमेगी... " राहुल ने अपनी व्हिस्की की बोतल उठा ली और कार में रख ली. दोनों साहिल के घर आ गए.
राहुल और रीता घर में घुसते ही चौंक गए. कामिनी वहां पहले से खड़ी थी.
"अरे तुम तो घर गयी थी ना...?" राहुल ने पूछा।
"हाँ पर भइया आ गए थे.... वो ही मुझे अभी छोड़ कर गए हैं...."
"तुम रात का खाना हमारे यहाँ खाना.... बना लिया है..."
साहिल भी बाथरूम से आ गया था.
करीब रात के ८.३० बज रहे थे. कामिनी बड़े प्यार से राहुल को निहार रही थी. रीता ने उसे हमेशा की तरह फिर पकड़ लिया. रीता ने उसे कहा - "बड़ा प्यार आ रहा है...जीजू पर.."
"चुप रह... वो तो हैं प्यारे से..." कामिनी हंस कर बोली
"क्यों मेरे जीजू प्यारे नहीं हैं क्या..."
"तो तू भी लाइन मार ले ना...."
"नहीं रे...... अब लाइन नहीं....कुछ और ही...."
"चुप...चुप... कुछ भी बोलने लगती है.." राहुल और साहिल दोनों ही बैटन का मजे ले रहे थे. राहुल ने मजाक किया -
"साहिल... कामिनी चाहे तो मुझ पर लाइन मार सकती है...."
"और मैं...रीता पर...." साहिल ने रीता को आँख मारते हुए कहा.
"अच्छा चलो... तुम रीता पर लाइन मरो और मैं कामिनी पर...आप क्या कहती हैं... कामिनी जी..... " राहुल ने अंधेरे में तीर छोड़ा.
"तुम लोग बहुत प्यारे मजाक करते हो...... तो चलो लाइन मरो...." कामिनी हंस पड़ी.
"आज एक्सचेंज करते हैं..... मंजूर है ?..साहिल. अब अपनी दोस्त भी तो पक्की हो जाए." राहुल ने कहा
"हाय रे... यानि रीता साहिल के पास और मैं राहुल के पास..." कामिनी ने आह भरते हुए कहा. व"तो मंजूर है... क्यो रीता..... तुम कहो..." साहिल बोला.  राहुल को पता था कि अभी थोडी देर पहले ही साहिल के साथ रीता की चुदाई हुयी थी. साहिल ने राहुल को फ़ोन पर ही बता दिया था कि रीता तो ख़ुद चुदवाने आ गयी थी. रीता ने जानबूझ कर शरमाने का नाटक किया.
"हाँ राहुल.... मजा आ जाएगा.. क्यों कामिनी....."
"तुम्हे साहिल चोदेगा और मैं कामिनी को...... तो साहिल हो जायें चालू..." राहुल ने बिना शरमाये समझा दिया.
राहुल ने कामिनी की तरफ़ देखा. कामिनी अपना चेहरा शर्म से छुपा लिया. राहुल बाहें फैला कर खड़ा हो गया. कामिनी धीरे धीरे राहुल के निकट आयी और उसकी बाँहों में सिमट गयी. रीता तो पहले ही तैयार थी, उसने मौका देखा. वो जाकर साहिल से चिपक गयी. कामिनी ने अपना चेहरा निकट लाते हुए कहा "राहुल ये अचानक कैसे हो गया.... मुझे जल्दी से प्यार कर लो...कहीं साहिल या रीता ने इनकार कर दिया तो.."
"नहीं कामिनी.... सब कुछ पहले से हमने सोच रखा था...रीता तो आज चुद चुकी है साहिल से.. बस आज के दिन ऐसा होगा ये नहीं पता था ....."
"क्या....... हाय...... मुझे पता होता तो मैं...पहले ही..."
राहुल ने देखा साहिल रीता की चुंचियां दबा रहा था. रीता ने साहिल का लंड पकड़ रखा था. कामिनी भी देख कर शरमा गयी.
"राहुल हाय ये देखो तो....."
"उन्हें अब चुदाई करने दो.."
कामिनी ने अपने होंट राहुल की तरफ़ बढ़ा दिए. राहुल ने उसके होंट अपने होटों से मिला दिए...और एक दूसरे को चूमने लगे. दोनों के शरीर में उत्तेजना भरने लगी. कामिनी को राहुल का मोटा लंड अपनी चूत के आस पास रगड़ता हुआ महसूस होने लगा. दोनों के बदन गरम होने लगे. राहुल का लंड अब खड़ा होने लगा था. उनके हाथ एक दूसरे के शरीर को टटोलने लगे. राहुल ने कामिनी की चूचियां अपने हाथों में भर ली. और धीरे धीरे सहलाने लगा. कामिनी ने उसके चूतडों को अपनी और खींच लिया. अब राहुल का लंड उसकी छूट में गड़ने लगा. राहुल की नजर रीता पर गयी. उनकी चुदाई में तेजी थी. वो पहले से खुले हुए थे. रीता की छूट में साहिल का लंड घुस चुका था. रीता उस से लिपटी जा रही थी. कामिनी उन्हें देख कर आह भरने लगी.
राहुल ने कामिनी का तंग पजामा नीचे सरका दिया. कामिनी ने इशारा पा लिया. उसने तुंरत ही अपना पजामा और टॉप उतार फेंका. राहुल ने भी अपने कपड़े उतार दिए. कामिनी ने साहिल और रीता को देखा तो राहुल से लिपट गयी. उन दोनों की चुदाई देख कर कामिनी तड़प उठी. अब दोनों ही नंगे खड़े थे. कामिनी ने राहुल को अपनी और खींचा और राहुल का लंड पकड़ लिया. राहुल ने कामिनी का नंगा बदन दबाना चालू कर दिया. दोनों मदहोशी में डूबने लगे.
वो अब बिस्तर पर आ गए और और एक दूसरे में समाने की कोशिश करने लगे. अब रीता और साहिल की सिस्कारियां बढती जा रही थी, जो राहुल और कामिनी के शरीर में आग भरने का काम कर रही थी. कामिनी ने अपनी टाँगें ऊपर उठा ली. राहुल उन के बीच में समां गया. अपने लंड को उसने कामिनी की चूत पर टिका दिया. चूत पानी छोड़ रही थी...चिकनी हो गयी थी..... लंड फिसल कर अन्दर घुसता चला गया...... कामिनी के मुंह से सिसकारी निकल पड़ी. कामिनी की आँखें आनंद के मारे बंद होने लगी. उसका लंड गहराईयों में उतरने लगा.
अचानक राहुल को लगा की उसकी गांड में लंड का स्पर्श हो रहा है. उसे पता चल गया कि रीता और साहिल चुदाई पूरी कर चुके हैं. अब साहिल ने अपना लंड फिर से तैयार कर लिया है. अब वो राहुल के पीछे खड़ा हो गया था. राहुल ने उस पर ध्यान नहीं दिया. उसे पता था कि साहिल अब उसकी गांड मारेगा.. साहिल राहुल के चूतड पकड़ कर उसे चौडा कर अपना लंड घुसाने की कोशिश करने लगा. राहुल को अब पीछे भी मजा मिल रहा था. साहिल ने राहुल की गांड में थूक लगाया और जोर लगा कर लंड गांड में घुसा दिया. इस से राहुल के लंड में और अधिक उत्तेजना भरने लगी. उसने कामिनी की चूत में धक्के तेज कर दिए. इस से साहिल को गांड मारने में थोडी मुश्किल आने लगी थी. रीता कामिनी की चुंचियां मसलने लगी. राहुल और कामिनी दोनों ही मदहोश हुए जा रही थी. दोनों को डबल मजा मिल रहा था.
"हाय राजा... जोर से.... चोद डाल.... हा...." अब कामिनी भी दिल की भड़ास मुंह से निकलने लगी. उसके चूतड नीचे से इंजन की तरह चल रहे थे.. राहुल भी बेकाबू होता जा रहा था..."कामिनी...... हाय...... मजा आ गया.... ये ले...येस...ये... और...ले.."
"मेरी रीता..... मसल डाल मेरी चुंचियां..... जोर से....अ आ अह ह्ह्ह ह्ह्ह हह...."

उधर साहिल राहुल की गांड चोद रहा था. राहुल को भी गांड मराने में मजा आता था.

कामिनी को लग रहा था कि अब वो झड़ने वाली है...... उसकी कमर तेज़ी से चलने लगी. रीता ने भी महसूस किया कि अब कामिनी ज्यादा देर तक नहीं टिकने वाली है. रीता ने उसके चूचुक खींचने और घुमाने चालू कर दिए। कामिनी का मुंह खुलने लगा...आहें बढ़ने लगी। अचानक ही उसने रीता का हाथ हटा दिया और राहुल को खींच कर अपनी बाहों में भींच लिया," मैं गई मेरे राज़ा...... गई आआह...... " उसने अपने होंठ भींच लिए.
उधर साहिल ने अपना लण्ड राहुल की गाण्ड से निकाल लिया और रीता के हाथ में दे दिया. रीता ने उसके लंड को पकड़ कर मुठ मारना चालू कर दिया. साहिल ने रीता के पास लाकर अपना लंड उसके मुंह में डाल दिया...और झड़ने लगा. और रस रीता के मुंह में भरने लगा. रीता रस को स्वाद ले कर पीने लगी.
उधर राहुल का लंड खड़ा ही था..... पर रीता को पता था उसे कैसे ठंडा करना है...... उसने तुंरत ही राहुल की गांड में अपनी उंगली डाल दी.... और उसके लंड कामिनी की चूत में से बाहर निकाल कर, गीले लंड की मुठ मारने लगी. गांड में अंगुली तेजी से घुमाने लगी...... तभी उसके लंड से रस उछल पड़ा. रीता दूध निकलने की तरह उसके लंड से रस निकलने लगी. राहुल अब घुटनों के सहारे बैठ गया था और गहरी साँसें भर रहा था. उधर साहिल भी जाकर लेट गया. लगा कि वो दोनों थक गए थे.
कामिनी ने रीता को देखा और दोनों हंस पड़ी. दोनों गले से लिपट गयी और एक दूसरे को प्यार करने लगी.
"हाय मेरा जीजू तेरे जीजू से ज्यादा बढ़िया चोदता है " कामिनी बोली.
"नही रे... मेरा जीजू ज्यादा अच्छी चुदाई करता है.." रीता ने भी तारीफ की.
"आज तो हम दोनों की दोस्ती.... और पक्की हो गयी...." कामिनी ने कहा.
"पहले हम दो दोस्त थी..अब चार हो गए हैं..... अब जी भर कर चुदाई कर सकते हैं ना...."
कामिनी ने राहुल को प्यार किया..... और रीता ने साहिल को चूम लिया.
अब सभी तैयार हो कर डिनर के लिए रवाना हो गए.

मेरी सहेली मेरी सगी बहन

मैं और कामिनी बचपन की सहेलियां है. हम स्कूल से लेकर कॉलेज तक साथ साथ पढ़े. और अब मेरी और कामिनी की शादी भी लगभग एक ही साथ हुयी थी. मेरा घर और उसका घर पास में था. कामिनी का पति बहुत ही सुंदर और अच्छे शरीर का मालिक था. मेरा दिल उस पर शुरू से ही था. मैं उस से कभी कभी सेक्सी मजाक भी कर लेती थी. वो भी इशारों में कुछ बोलता था जो मुझे समझ में नहीं आता था. कामिनी भी मेरे पति पर लाइन मारती थी ये मैं जानती थी. जब हमारे पति नहीं होते तो हम दोनों साथ ही रहते थे.
उन दोनों के ऑफिस चले जाने के बाद मैं कामिनी के घर चली जाती थी. कामिनी आज कुछ सेक्सी मूड में थी.
मैंने कामिनी से कहा - "आज चाय नहीं..कोल्ड ड्रिंक लेंगे यार."
"हाँ हाँ क्यों नहीं..."
हम सोफे पर बैठ गए. कामिनी मुझसे बोली- "सुन एक बात कहूं...बुरा तो नहीं मानेगी..."
"कहो तो सही.."
"देख बुरा लगे तो सॉरी...ठीक है ना..."
"अरे कहो तो सही..."
"कहना नहीं....करना है..."
"तो करो......बताओ.." मैं हंस पड़ी.
उसने कहा - "रीता.. आज तुझे प्यार करने की इच्छा हो रही है..."
"तो इसमे क्या है.... आ किस करले.."
"तो पास आ जा.."
"अरे कर ले ना..." मुझे लगा कि वो कुछ और ही चाह रही है
कामिनी ने पास आकार मेरे होटों पर अपने होंट रख दिए. और उन्हे चूसने लगी. मैंने भी उसका उत्तर चूम कर ही दिया. इतने में कामिनी का हाथ मेरे स्तनों पर आ गया और वो मेरे स्तनों को सहलाने लगी. मैं रोमांचित हो उठी.. "ये क्या कर रही है कामिनी....."
"रीता मुझसे आज रहा नहीं जा रहा है...तुझे कबसे प्यार करने कि इच्छा हो रही थी....."
"अरे तो तुम्हारे पति...नहीं करते क्या.."
"कभी कभी करते है..... अभी तो ७-८ दिन हो गए हैं..... पर रीता मैं तुमसे प्यार करती हूँ....मूझे ग़लत मत समझना.."
उसने मेरे स्तनों को दबाना चालू कर दिया. मूझे मजा आने लगा. मेरी सहेली ने आज ख़ुद ही मेरे आगे समर्पण कर दिया था. मैं तो कब से यही चाह रही थी. पर दोस्ती इसकी इज़ज्ज़त नहीं देती थी. मुझे भी उसे प्यार करने का मौका मिल गया. अब मैंने अपनी शर्म को छोड़ते हुए उसकी चुन्चियों को मसलना शुरू कर दिया. वो मन में अन्दर से खुश हो गयी. वो उठी और अन्दर से दरवाजा बंद कर लिया. मैं भी उसके पीछे उठी और उसके नरम नरम चूतड पकड़ लिए. कामिनी सिसक उठी. बोली -"मसल दे मेरे चूतडों को आज...रीता...मसल दे..."
मैंने कामिनी का पजामा और टॉप उतार दिया. अब वो मेरे सामने नंगी खड़ी थी. मैं भी अपने कपड़े उतारने लगी. पर वो बोली, "नहीं रीता...तू मुझे बस ऐसे ही देखती रह..... मेरे बूब्स मसल दे..... मेरी छूट को घिस डाल...उसे चूस ले... सब कर..ले "
मैं उसे देखती रह गयी. मैंने धीरे उसके चमकते गोरे शरीर को सहलाना चालू कर दिया. पर मुझसे रहा नही गया. मैं भी नंगी होना चाहती थी. मैंने भी अपना पजामा कुरता उतार दिया, और नंगी हो कर उस से लिपट गयी. हम दोनों एक दूसरे को मसलते दबाते रहे और सिसकियाँ भरते रहे.
अब हम बिस्तर पर आ गए थे, हम दोनों ६९ की पोसिशन में आ गए. उसने मेरी चूत चीर कर फैला दी और अपनी जीभ से अन्दर तक चाटने लगी. अचानक उसने मेरा दाना अपनी जीभ से चाट लिया. मैं सिहर गयी. मैंने भी उसकी चूत के दाने को जीभ से रगड़ दिया. उसने अपनी चूत मेरे मुंह पर धीरे धीरे मारना चालू कर दिया. और मेरी चूत को जोर से चूसने लगी. मैंने उसकी चूत मैं अपनी उंगली घुसा दी और गोल गोल घुमाने लगी. वो आनंद से भर कर आहें भरने लगी. मेरी चूत में उसकी जीभ अन्दर तक घूम चुकी थी. मुझे मीठा मीठा सा आनंद से भरपूर अह्स्सास होने लगा था. हम दोनों की हालत बुरी हो रही थी. लगता था कि थोडी देर में झड़ जाएँगी.
उसी समय मोबाइल बज उठा. कामिनी होश में आ गयी. हांफती हुयी उठी और मोबाइल उठा लिया.
वो उछल पड़ी. मोबाइल बंद करके बोली- "अरे वो बाहर खड़े हैं.... जल्दी उठ रीता...कपड़े पहन..."
"जल्दी कैसे आ गए....???????"
हम दोनों ने जल्दी से कपड़े पहने और बालकनी पर आ गए. नीचे साहिल खड़ा था. वो दरवाजा खोल कर अन्दर आ गया.
अन्दर उसने मुझे देखा और मुस्कराया. मैं भी मुस्करा दी.
"सुनो तुम्हे अभी मायके जाना है.... मम्मी बहुत बीमार हैं..."
उसकी मम्मी शहर में १० किलोमीटर दूर रहती थी. मैं कामिनी से विदा ले कर घर आ गयी. उसे करीब १ घंटे बाद कार में जाते हुए देखा.
शाम को मैं घर के बाहर ही फल, सब्जी खरीद रही थी. मैंने देखा कि साहिल कार में घर की तरफ़ जा रहा था.
मैंने घड़ी देखी तो ४ बजे थे. मेरे पति ७ बजे तक आते थे. मेरे मन में सेक्स जाग उठा. मैंने तुंरत ही कुछ सोचा और सामान सहित कामिनी के घर की तरफ़ चल दी. साहिल घर पर ही था. मैंने घंटी बजाई. तो साहिल बाहर आया.
"मम्मी कैसी हैं ?...."
"ठीक हैं, ४ -५ दिन का समय तो ठीक होने में लगेगा ही.. आओ अन्दर आ जाओ.."
"तो खाना कौन बनाएगा... आप हमारे यहाँ खाना खा लीजियेगा...."
वो मतलब से मुस्कुराते हुए बोला - "अच्छा क्या क्या खिलाओगी.."
मैंने भी शरारत से कहा- "जो आप कहें....... नारंगी खाओगे...जीजू...." उसकी नजर तुरन्त मेरे स्तनों पर गयी. मेरी नारंगियों के उभारों को उसकी नजरें नापने लगी.
"हाँ अगर तुम खिलाओगी तो.... तुम क्या पसंद करोगी.." साहिल ने तीर मारा
"हाँ... मुझे केला अच्छा लगता है..." मैंने उसकी पेंट की जिप को देखते हुए तीर को झेल लिया.
"पर..आज तो केला नहीं है..."
"है तो... तुम खिलाना नहीं चाहो तो अलग बात है..." मैंने नीचे उसके खड़े होते हुए लंड को देखते हुए कहा.. उसने मुझे नीचे देखते हुए पकड़ लिया था. "अच्छा..अगर है तो फिर आकर ले लो.." साहिल मुस्कराया
"अच्छा मैं चलती हूँ...जीजू... केला तो अन्दर छुपा रखा है..मैं कहाँ से ले लूँ?." मैंने सीधे ही लंड की ओर इशारा कर दिया. मैं उठ कर खड़ी हो गयी. वो तुंरत मेरे पीछे आया और मुझे रोक लिया- "केला नहीं लोगी क्या.... मोटा केला है......"
मैंने प्यार से उसे धक्का दिया- "तुमने नारंगी तो ली ही नहीं.. तो मैं केला कैसे ले लूँ.." मैंने तिरछी नजरों का वार किया.
उसने पीछे से आ कर - धीरे से मेरी चुंचियां पकड़ ली. मैं सिसक उठी. मैंने अपनी आँखें बंद कर ली. "ये नारंगियाँ बड़ी रसीली लग रही हैं "
"साहिल...... क्या कर रहे हो..."
"बस रीता.......तुम्हारी नारंगी... इतनी कड़ी नारंगी... कच्ची है क्या..."
उसका लंड मेरे चूतडों पर रगड़ खाने लगा. मैंने उसका लंड हाथ पीछे करके पकड़ लिया.
"इतना बड़ा केला..... हाय रे...जीजू "
" रीता... नीचे तुम्हारे गोल गोल तरबूज....हैं.... मार दिया मुझे. उसके लंड ने और जोर मारा. लगा कि मेरा पजामा फाड़ कर मेरी गांड में घुस जायेगा. मैंने मुड कर साहिल की ओर देखा. उसकी आंखों में वासना के डोरे नजर आ रहे थे. मैं भी वासना के समुन्दर में डूब रही थी. मैंने अपने आप को ढीले छोड़ते हुए उसके हवाले कर दिया. उसने मेरी आंखों में आँखें डालते हुए प्यार से देखा... मैं उसकी आंखों में डूबती गयी. मेरी आँखें बंद होने लगी. उसके होंट मेरे होटों से टकरा गए. अब हम एक दूसरे के होटों का रस पी रहे थे.
साहिल ने मेरे एलास्टिक वाले पजामे को धीरे से नीचे खींच दिया. मैंने अन्दर पेंटी नहीं पहनी थी. उसका हाथ सीधे मेरी चूत से टकरा गया. उसने जोश में आकर मेरी चूत को भींच दिया. मै मीठी मीठी अनुभूति से कराह उठी. उसके दूसरे हाथ ने मेरे स्तनों पर कब्जा कर लिया था. मेरे उरोज कड़े होने लग गए थे. मेरा पाज़ामा धीरे धीरे नीचे तक सरक गया। सहिल ने ना जाने कब अपनी पैन्ट नीचे सरका ली थी।
उसका नंगा लण्ड मेरी गाण्ड से सट गया। लण्ड की पूरी मोटाई मुझे अपने चूतड़ों पर महसूस हो रही थी। मुझे लगा कि मैं लण्ड को अन्दर डाल लूं और मज़ा लूं। मेरे चिकने चूतड़ों की दरार में उसका लण्ड घुसता ही जा रहा था। मैंने अपनी एक टांग थोड़ी सी ऊपर कर ली उसका लंड अब सीधे गांड के छेद से टकरा गया. गांड के छेद पर लंड स्पर्श अनोखा ही आनंद दे रहा था. उसने अपने लण्ड को वहां पर थोड़ा घिसा और मुझे जोर से जकड़ लिया. उसके लंड का पूरा जोर गांड के छेद पर लग रहा था. लण्ड की सुपारी छेद को चौड़ा करके अन्दर घुस पड़ी थी. मैं सामने की मेज़ पर हाथ रख कर झुक गयी और चूतडों को पीछे की और उभार दिया. टांगे थोड़ी और फैला दी.
"आह ...... रीता ..... बड़ी चिकनी है ....... क्या चीज़ हो तुम. .."
"साहिल ...... कितना मोटा है ........ अब जल्दी करो ..."
"हाय .... इतने दिन तक तुमने तड़पाया ..... पहले क्यों नहीं आयी ...."
"मेरे राजा ....अब गांड चोद दो .... मत कहो कुछ .."
"ये लो मेरी रीता ..... क्या चिकने चूतड हैं ..... "
"हाँ मेरे राजा ...मैं तो रोज तुम पर लाइन मारती थी .... तुम समझते ही नहीं थे ..... हाय मर गयी ..."
उसने अपना पूरा लण्ड मेरी गांड की गहरायी में पहुँचा दिया.
"राजा मेरे ..... अब तो मेहरबानी कर ना ......."
"बस अब ....कुछ ना बोलो ... अब मजा आ रहा है .... हाय ... रीता ...... मस्त हो तुम तो ...."
साहिल के धक्के बढ़ते जा रहे थे ..... मुझे असीम आनंद आने लगा था. वो गांड मारता रहा ... मैं गांड चुदाती रही. उसके धक्के और बढ़ने लगे. उसका लण्ड मेरी गांड की दीवारों से रगड़ खा रहा था. छेद उसके लण्ड के हिसाब से थोड़ा छोटा ही था ...इसलिए ज्यादा रगड़ खा रहा था. मेरी गांड चुदती रही. मैं आनंद के मारे जोर जोर से सिस्कारियां भर रही थी.
अब साहिल ने धीरे से लण्ड छेद से बाहर खींच लिया. और मुझे चिपका लिया मेरे हाथ ऊपर कर दिये. पीछे से उसने मेरी छातियाँ कस कर पकड़ ली और मसलने लगा.
"रीता ... अब मैं कहीं झड़ ना जाऊं ... एक बार लण्ड को चूत का सामना करवा दो ....."
मैं हंस पड़ी - "आज मैं इसी लिए तो आई थी .... मुझे पता था कि कामिनी नहीं है .... तुम अकेले ही हो ...और अगर आज तुमने लाइन मारी तो तुम गए काम से ..."
दोनों ही हंस पड़े .... हम दोनों बिस्तर पर आ गए .... मैंने कहा ...."साहिल ... मैं तुम्हें पहले चोदूंगी ..... प्लीज़ ... तुम लेट जाओ .... मुझे चोदने दो ..."
" चाहे मैं चोदूं या तुम ... चुदेगी तो रीता ही ना .... आ जाओ ..." कह कर साहिल हंसने लगा.
वो बिस्तर पर सीधे लेट गया. उसके लण्ड कि मोटाई और लम्बाई अब पूरी नजर आ रही थी. मैं देख कर ही सिहर उठी. मेरे मन में ये सोच कर गुदगुदी होने लगी कि इतने मोटे लण्ड का स्वाद मुझे मिलेगा. मैं धीरे से उसकी जांघों पर बैठ गयी. उसके लण्ड को पकड़ कर सहलाया और मोटी सी सुपारी को चमड़ी ऊपर करके सुपारी बाहर निकाल दी. मैंने अपनी लम्बी चूत के होठों को खोला और उसकी लाल लाल सुपारी को मेरी लाल लाल चूत से चिपका दिया. पर साहिल को कहाँ रुकना था. सुपारी रखते ही उसके चूतड़ों ने नीचे से धक्का मार दिया. सुपारी चूत को चीरते हुए अन्दर घुस गयी. मैं आनंद से सिसक उठी.
"हाय रे .... घुसा दिया अन्दर .... मेरी सहेली के चोदू , मेरे राजा ..."
कहते हुए मैं उस पर लेट गई. वो गया नीचे दबा हुआ था इसलिए पूरी चोट नहीं दे पा रहा था. पर मेरे आनंद के लिए उतना ही बहुत था. मैंने उसे जकड़ लिया. अब मेरे से भी उत्तेजना सहन नहीं हो रही थी. मैंने अपनी चूत लण्ड पर पटकनी चालू कर दी. फच फच की आवाजों से कमरा गूंजने लगा. हम दोनों आनंद में सिस्कारियां भर रहे थे.
"हाय मेरे राजा ..... मजा आ रहा है ..... हाय चूत और लंड भी क्या चीज़ है ....... हाय रे ..."
"रीता ..... लगा ... जोर से लगा .... और चोद. .... निकाल दे अपने जीजू के लण्ड का रस ...."
मैंने अपनी गति बढ़ा दी. चूतड़ों को हिला हिला कर उसका लण्ड झेल रही थी. उसका लण्ड मेरे चूत के चिकने पानी से भर गया था.
"हाँ ..मेरे राजा ..... ये लो .... और लो ..."
पर साहिल को ये मंजूर नहीं था ... उसने मुझे कस के पकड़ा और एक झटके में अपने नीचे दबोच लिया. वो अब मेरे ऊपर था. उसका लण्ड बाहर लटक रहा था. उसने अपना कड़क मोटा लण्ड चूत के छेद पर रखा और उसे एक ही झटके में चूत की जड़ तक घुसा डाला. मुझे लगा कि सुपारी मेरे गर्भाशय के मुख से टकरा गयी है. मैं आह्ह्ह भर कर रह गयी. अपनी कोहनियों के सहारे वो मेरे शरीर से ऊपर उठ गया. मेरे जिस्म पर अब उसका बोझ नहीं था. मैं एक दम फ्री हो गयी थी. मैंने अपने आप को नीचे सेट किया और टांगे और ऊपर कर ली. साहिल ने अब फ्री हो कर जोरदार शोट मरने चालू कर दिए. मुझे असीम आनंद आने लगा. मैंने भी अब नीचे से चूतड़ों को उछाल उछाल कर उसका बराबरी से साथ देना चालू कर दिया. मैं अब कसमसाती रही .... चुदती रही .....उसकी रफ्तार बढती रही ..... मुझे लगने लगा कि अब सहा नहीं जाएगा ... और मैं झड़ जाऊंगी ...मैंने धक्के मारने बंद कर दिए .. और ऑंखें बंद करके आनंद लेने लगी ... मैं चरम सीमा पर पहुच चुकी थी ....... जैसे जैसे वो धक्के मारता रहा मेरा ...रज निकलने लगा ...मैं छूटने लगी ... मैं झड़ने लगी. .... रोकने की कोशिश की पर .... नहीं ... अब कुछ नहीं हो सकता था ..... मैं सिस्कारियां भरते हुए पूरी झड़ गयी ..... मैं ढीली पड़ गयी .... अब उसके धक्के मुझे चोट पहुचने लगे थे... लेकिन उसकी तेजी रुकी नहीं ... कुछ ही पलों में .... सुहानी बरसात चालू हो गयी. उसने अपना लण्ड बाहर निकाल लिया था .... और उसका पानी मेरी छातियों को नहला रहा था. मैं हाथ फैलाये चित्त पड़ी रही. वो अपने वीर्य पर ही मेरी छाती से लग कर चिपक गया. उसका वीर्य बीच में चिकना सा आनंद दे रहा था ....... साहिल मुझे चूमता हुआ उठ खड़ा हुआ .... मैंने भी आँख खोल कर उसकी तरफ़ देखा. और प्यार से मुस्कुरा दी. मुझे अपनी चुदाई की सफलता पर नाज़ था.
अगले भाग का इतंज़ार करें.

हॉस्टल में रैगिंग

कामिनी सक्सेना
मैं जब हॉस्टल में आई तो मैंने देखा वहां पर रूम बड़े अच्छे और सभी सामान के साथ थे. एम ए की पढाई करने वालों के लिए सिंगल रूम था. रूम देख कर मैं बहुत खुश थी. हॉस्टल में आते ही जो अनुभव मुझे हुआ वो मैं आपको बताती हूँ।
शाम को हॉस्टल में सभी नए और पुराने स्टुडेंट डिनर के लिए मेस में जा रहे थे. रूम के बाहर ही मुझे तीन सिनियर लड़कियां टकरा गयी. उन्होंने मुझे देखा. मैंने उन्हें गुड इवेनिंग कहा. वो आगे निकल गयी , उनमे से एक मुड़कर वापस आयी और कहा – “क्या नाम है ......”
"कामिनी सक्सेना ..”
"डिनर के बाद १० बजे रूम नम्बर २० में मिलो ..."
"कोई काम है दीदी .."
"नई आयी हो. ... सभी को तुम्हारा स्वागत करना है .."
"जी ......अच्छा ....."
वो मेस में चली गयी. मुझे पसीना छूटने लग गया. मैं समझ गयी थी की अब मेरी रागिंग होगी .
मेस में मुझसे खाना भी ठीक से खाया नही गया .जैसे तैसे मैंने खाना पूरा किया और अपने रूम में आ गयी. घबराहट में मुझे कुछ सूझ नही रहा था कि मैं क्या करूं। समय देखा तो रात के १० बजने वाले थे. मन मजबूत करके १० बजे में उठी और रूम नम्बर २० के आगे जाकर खड़ी हो गयी. मैं दरवाजा खटखटाने ही वाली थी की वो सीनियर लड़की मेस से आती हुयी दिखायी दी. आते ही बोली - "आ गई ... कामिनी ..."
"जी हाँ ..." मैंने सर झुकाए कहा .
"मेरा नाम मंजू है ...पर तुम मुझे दीदी कहोगी "उसने दरवाजा खोलते हुए कहा -"आ जाओ अन्दर .."
मैं उसके कमरे में आ गयी. उसने मुझे बैठने को कहा .
"पहली बात सुनो ...जब कोई सीनियर तुम्हे नज़र आए तो तुम उसे विश करोगी ...."वो मुझे नियम समझती रही. फिर बोली - "अच्छा अब तुम स्वागत के लिए तैयार हो .."
मैं चुप ही रही ...पर पसीना आने लग गया था ..
"घबराओ मत ..... सिर्फ़ स्वागत ही है ..."
"....जी. .."
"खड़े हो जाओ. .....और अपना सीना आगे को उभारो "
मैंने अपना हाथ पीछे करके अपना सीना आगे उभार दिया ..
"शाबाश ...... अच्छे है .... अब अपना टॉप उतार दो .."
"नही दीदी ......शर्म आती है ......"
"वोही तो दूर करना है "
"कोई देख लेगा ....दीदी .... और सीनियर भी तो आने वाली है ...."
"अब उतारती हो या मैं उतारूं "
मैंने अपना टॉप उतार दिया. उसने ब्रा भी उतारने को कहा. थोड़ा झिझकते हुए मैंने ब्रा भी उतार दी .
"यहाँ पास आओ "
मैं दीदी के पास गयी. मंजू ने खड़े हो कर पहले मुझे पास से देखा. फिर मेरे स्तनों पर हाथ लगाते हुए कहा -"सुंदर है ....." फिर मेरी छातियों को सहलाना शुरू कर दिया. मुझे सिरहन होने लगी. उसने मेरी चुन्चियों को हौले से दबा कर घुमाया .. मेरी सिसकारी निकल गयी. वो जो कुछ कर रही थी ...मुझे डर तो लग रहा था ... पर उसकी हरकतों से मजा भी आ रहा था. फिर वो पीछे गयी और मेरे चूतड़ों को निहारा. अपने हाथों से उसे सहलाने लगी और दबा दिया.
"किस करना आता है ..."
मैंने कहा - "जी हां ..आता है "
"मेरे होंट पर किस करो .."
मैंने धीरे से किस कर दिया. वो बोली – “किस ऐसे नही करते हैं ”. उसने मेरे नरम होंट अपने होंट से भींच कर चूसना चालू कर दिया .बोली - "ऐसे समझी ..... अब अपनी स्लैक्स उतारो "
" दीदी ऐसे तो मैं नंगी हो जाऊंगी ..."
"वो तो स्वागत में सबको नंगी होना पड़ता है .."
मैंने अपनी स्लेक्स उतार दी और सीधी खड़ी हो गयी .."
मंजू ने पास आकर मेरा बदन सहलाया ..और मेरी चूत पर हाथ फेरना चालू कर दिया. बीच बीच में वो मेरे चुतड़ भी सहलाती और दबाती जा रही थी ....
"दीदी अब कपड़े पहन लूँ ....दूसरे सीनियर्स आ जायेंगे .."
"वो देर से आयेंगे .... अब तुम मेरे कपड़े उतारो " मंजू थोड़ा मुस्कराते हुए बोली .
मैंने उसका कुरता उतार दिया. उसने ब्रा नही पहनी थी. उसके बूब्स उछल कर बाहर आ गए .
"...हाँ अब मेरा पजामा भी उतार दो ...और मुझे अपने जैसी नंगी कर दो ."
मैंने मंजू को पूरी नंगी कर दिया .
"अब तो खुश हो न .... अब तुम्हे शर्म तो नही आ रही है ..."
मैंने सर झुका कर मुस्करा कर कहा - "नही दीदी .... अब तो आप भी .."
" अच्छा अब बताओ ......इसे क्या कहते हैं ....."
"स्तन या बोबे .."
"देसी भाषा में बताओ .."
"जी ...चूचियां ...."
"गुड ....अब बताओ नीचे इसे क्या कहते हैं ...."
"जी ...चूत ..." मैं शरमा कर बोली .
"वाह तुम तो सब जानती हो ...आओ गले लग जाओ .."
मंजू ने मुझे गले लगा लिया .... उसका हाथ मेरी चूतडों पर चला गया ....और उन्हें मसलने लगा. अब मुझे लग रहा था कि रैगिंग तो बहाना था ...वो मेरे साथ सेक्स करना चाहती थी. मंजू गरम होने लगी थी. उसने कहा -
"कामिनी ....तुम भी ऐसे ही कुछ करो ..."
मैंने उसके बूब्स सहलाने चालू कर दिए. उसके मुंह से सिस्कारियां निकलने लगी ..
"हां जोर से मसलो .... चुचियों को खेंचो ..."
मैं उसकी चुन्चियों को खीचने मसलने लगी. अचानक मैंने महसूस किया कि उसने एक उंगली मेरी चूत में घुसा दी है. मैं चिहुक उठी. 
"हाय ...दीदी .... मैं मर गयी ....."
"अच्छा लग रहा है ना ..."
"हाँ दीदी ..."
मैं भी उसकी चूत में अपनी उंगली और अन्दर घुमाने लगी ......
"अब ...बस ...." कह कर मंजू दूर हट गयी ."कपड़े पहन लो .."
हम दोनों ने कपड़े पहन लिए ..... वो अलमारी में से मिठाई निकाल कर लाई .... और मेरे मुंह में एक टुकडा डालते हुए कहा -"मुंह मीठा करो ...तुम्हारा स्वागत पूरा हो गया ..... स्वागत से डर नही लगा ना ..."
"नहीं दीदी ...मुझे बहुत मजा आया ..."
"धन्यवाद कामिनी ....... मजा मुझे भी आया ."
मैं अचानक मंजू से लिपट गयी ..- "दीदी आज रात में तुम्हारे साथ रह जाऊं "
दीदी ने प्यार से मेरी पीठ पर हाथ फेरते हुए कहा - "क्यों ..... क्या इरादा है ....."
" दीदी अब मैं रात भर सो नहीं सकती ...... मुझे शांत कर दो. .."
"तुम्हे जाने कौन देगा ........ मुझे भी तो पानी निकलना है ..."
हम दोनों फिर से कपड़े उतार कर अब बिस्तर पर आ गये .
लेटे लेटे मैंने मंजू से पूछा –“वो और सीनियर लड़कियां अभी आएँगी तो …….”
“कोई नहीं आयेगा …”
“पर आप तो कह रही थी ….कि सभी आएँगी ”
उसने मेरे मुंह पर उंगली रख दी.
“मैंने तुम्हे देखा था तो मुझे लगा था कि तुम्हें पटाया जा सकता है ….इसलिए मैं वापिस आयी और तुम्हें बुलाया ….उन लड़कियों को नहीं मालूम है .”
कहते हुए उसने अपनी नंगी जांघ मेरी कमर में डाल दी. और अपने होंट मेरे होटों पर रख दिए. धीरे से उसने मेरा एक बूब सहलाना चालू कर दिया . मैंने भी उत्तर में उसे अपने ऊपर खींच लिया. मेरी उत्तेजना बढ रही थी. उसके होंट मैंने अपने होटों में दबा लिए. वो मेरे ऊपर चढ़ कर मुझसे जोर से लिपट गयी. और मेरे होटों को चूसने लगी. मैं उसके स्तनों को दबाने, मसलने लगी. उसके मुंह से सिसकारी निकल पड़ी. हम दोनों मस्ती में डूब गए थे. उसने अब अपनी चूत मेरे चूत से मिला दी और लड़कों की तरह मेरी चूत पर अपनी चूत पटकने लगी .
“ हाय रे ….कितना मज़ा आ रहा है ..” मंजू सिसक के बोली .
“ हाँ दीदी बहुत मज़ा आ रहा है ….मेरी चूत तो गीली हो गयी है ..” मैंने कहा
“मेरे चुतड पकड़ के दबा दे …हाय ..” अपनी चूत घिसती हुयी बोली. मैं उसकी गोलाईयां दोनों हाथो से दबाने लगी ….. उसका एक हाथ मेरी चूत पर पहुँच गया और मंजू ने दो उंगलियाँ मेरी चूत में घुसा दी. मैं सिस्कारियां भरने लगी …
“दीदी और जोर से उंगली घुमाओ … ”हाय …मजा आ रहा है … दीदी लंड होता तो कितना मज़ा आता …”
“ हाँ …. लंड तो लंड होता है …… सुन मेरे पास है …तुझे उस से चोदुं ..”
मैं उस से लिपट गयी … “हाँ …हाँ मंजू जल्दी से लाओ ..
मंजू ने तकिये के नीचे से चुपचाप लंड निकाल लिया. मुझे पता ही नहीं चलने दिया कि उसके हाथ में लंड है ..
बोली – “अपनी टाँगे ऊपर कर लो… ”
“पहले लंड लाओ तो सही …”
“नहीं पहले टाँगे ऊपर उठा लो …मुझे तुम्हारी चूत देखनी है …”
मैंने अपनी दोनों टाँगे ऊपर कर ली. दीदी ने प्यार से चूत सहलाई और लंड को चूत पर रख दिया और धीरे से अन्दर घुसा दिया .
“हाय दीदी ….ये क्या …….लंड अन्दर कर दिया ..” मुझे मोटा लंड , अपनी चूत में घुसता महसूस हुआ. “दीदी अब देर नहीं करो …. हाथ चलाओ …….. चोद दो दीदी ..”
मंजू धीरे धीरे लंड को अन्दर बाहर करने लगी ….
“हाय रे दीदी ….मज़ा आ गया ….. लगा ..और लगा ..”
वो अपना हाथ तेजी से चलाने लगी. मैं भी आनंद के मारे इधर उधर लोटने लगी …. करवटें बदलने लगी. पर मंजू भी मेरी करवटों के साथ साथ कस कस के अन्दर बाहर लंड को चलने लगी. उसने चोदना चालू रखा. मैं जोश के मारे करवटें बदल कर उलटी हो गयी . पर मंजू ने लंड नहीं निकलने दिया और अपने दूसरे हाथ का सहारा लेकर लंड को अन्दर बाहर करती रही. मैं आनंद के मारे घोडी बन गयी. अपने चूतडों को दीदी के सामने कर दिया. पर उसने लंड नहीं छोड़ा और हाथ चलता ही गया.
“हाय दीदी … मेरा निकाल जाएगा …अब लंड निकाल दो ..”
“झड़ने वाली है तो झड़ जा …अब निकल जाने दे ….छोड़ दे अपना पानी …चल निकाल दे ….”
“दीदी अभी तो इस से मुझे गांड भी चुदवानी है ना ….फिर मज़ा नहीं आयेगा ….”
“अच्छा तो ये ले ……” उसने मेरी चूत से लंड निकाल दिया. और अब मेरी चूतडों की दोनों फाकें सहलाने लगी और उसे खींच कर फैला दी. मेरा गांड का छेद खुल गया. मेरी गांड के छेद में उसने थूक लगाया और फिर उस पर लंड रख दिया. मंजू बोली – “अब चालू करें ….”
“ हाँ दीदी … घुसा दो ..”
दीदी ने लंड को अन्दर ठेल दिया. फिर और अन्दर घुसाया. फिर हलके से बाहर निकाल कर अन्दर डाल दिया. मुझे मीठा मीठा सा मज़ा आने लगा . मंजू की स्पीड बढती गयी. मुझे मज़ा आने लगा …… उसी समय दीदी ने अपनी उंगली मेरी चूत में डाल दी और अन्दर घुमाने लगी. चूत से पानी तो पहले ही निकल रहा था. अब दोनों तरफ़ से डबल मज़ा आने लगा. अब मेरे से सहन नहीं हो रहा था ……..
“दीदी क्या कर रही ….आह्ह ह्ह्ह ….मज़ा आ रहा आया है ….. दीदी … हाय रे ….. मुझे ये क्या हो रहा है …….दीदी …मैं मर जाऊंगी …….ऊओई एई …सी ….सी ……. अरे ….अरे ….मैं गयी …. निकला …. निकला … दीदी ……गयी मैं तो दीदी …… हाय …..हाय ….. ऊऊह ह्ह्छ …अआया आई ईईई .”
कहते हुए मैं बिस्तर पर घोडी बनी हुयी एक तरफ़ लुढ़क गई. मैं हांफ रही थी .
मंजू कह रही थी – “कैसा लगा ….. मज़ा आया ना …”मैंने आँख बंद किए ही सर हाँ में हिलाया. फिर मैं उठी .
मंजू ने कहा – “अब मेरी बारी है ….हाथ चलते ही रहना मैं चाहे कितना ही करवटें बदलूं या उछल कूद मचाऊं. लंड बाहर नहीं निकलना चाहिए …जैसे कि मैंने नहीं निकलने दिया था …ऐसे में पूरा मजा आता है .”
“दीदी तुम्हें तो बहुत अच्छा अनुभव हो गया है …इस लंड से चोदने का ..”
“अच्छा तो चालू हो जाओ …”
मैंने भी उसकी लंड से चुदाई चालू कर दी ……… वो भी तरह तरह से चुदवाती रही …फिर उसका भी पानी निकाल दिया. हम दोनों फिर दूर हो गयी और टांगे फैला कर नंगी ही लेट गयी. जाने कब धीरे से नींद ने आ घेरा और मैं गहरी नींद में सो गयी. सवेरे उठी तो देखा दीदी ने मुझे एक चादर ओढा दी थी. उसने मुझे मुस्करा कर देखा और झुक कर किस किया. और कहा – “कामिनी ….थंक यू ..”
ये मेरा हॉस्टल का अनुभव है जो मैं आप तक पहुँचा रही हूँ. अपने कमेन्ट जरूर भेजे.

मैं उनका शिष्य

मैंने एक फ्लैट किराये पर लिया था जिसमें आगे की तरफ माकन मालिक और पीछे के रास्ते से मेरा फ्लैट था जो कि दो कमरों का अच्छा सेट था। मैं कब आऊँ, कब जाऊँ किसी को कोई मतलब नहीं था। पीछे के दरवाज़े की एक चाभी भी मेरे पास रहती थी। कभी कभी मकान मालिक का बेटा ही उस तरफ आता था जो मुझसे काफी बड़ा था। या कभी मकान मालिक अपने पोतों के साथ आते थे। इस मकान को लेने के बाद मुझे ऐसा लगा कि गलती कर दी क्यूंकि कोई भी माल नज़र नहीं आ रहा था। कुछ एक जो थे वो काफी दूर रहते थे और कोई जुगाड़ बन नहीं रहा था। करीब डेढ़ महीने बाद एक भाभी जी करीब ३० साल की होगी, सामने के मकान में आई। उनके परिवार में ३ बच्चे और उनके पतिदेव थे। बच्चे भी ठीक ठीक उम्र के थे एक लड़की करीब १० साल की, एक लड़का ६ साल का और एक ३ साल का।
पहले कुछ दिन तो मैंने ध्यान नहीं दिया और अपने ऑफिस आता जाता रहा लेकिन एक दिन शाम को जब मैं चाय पी रहा था तो देखा कि भाभी जी छत पर खड़ी हैं और घूर घूर कर मुझे देख रही हैं। मैं थोड़ा सा झेंप गया लेकिन सोचा कि शायद नए हैं इसीलिए देख रही होंगी कि कौन कौन आस पास रहता है। पर फिर ये ही मंज़र रोज रोज होने लगा वो छत पर आती और घूरती रहती थी। वैसे मेरी और उनकी खिड़की भी लगभग आमने सामने ही थी और दरवाज़ा भी, लेकिन मेरा फ्लैट उनके फ्लैट से थोड़ा ऊंचाई पर बना था तो मैं तो आराम से देख सकता था कि उनके कमरे में क्या हो रहा है पर वो नहीं देख सकती थी। अगर मैं खिड़की पर खड़ा होता तभी नज़र आता। उनके पति जो करीब ४४-४६ साल के थे दरअसल एक सरकारी विभाग में थे और सुबह जल्दी जाते थे और शराब के शौकीन थे इसलिए रात को देर से ही आते थे।
एक दिन मकान मालिक को कुछ काम था और उनका बेटा भी घर पर नहीं था, तो उन्होंने मुझसे कहा- बेटा तुम्हारे सामने जो नए लोग आए हैं उन्हें जरा ये सरकारी पेपर दिखा लाओ और पूछो कि इसमें क्या कर सकते है। मैंने कहा- ठीक है ! और पेपर लेकर मैं उनके घर गया घंटी बजाई तो भाभी जी ने दरवाजा खोला और अन्दर बुलाया। मैंने भाई साहब यानि उनके पति के बारे में पूछा तो बोली कि वो तो देर
से आएंगे, मैं उन्हें ही बता दूँ ! मैंने पेपर दिखा कर जानकारी ली, उन्हें जो कुछ मालूम था मुझे बताया और कहा कि मैं रात को उनके पति से मिलकर पूरी बात समझ लूँ। मैं उठने लगा तो बोली- बैठिये न ! आप तो पड़ोसी हैं ! फिर वो चाय नाश्ता वगैरह लाई और बातें करने लगी। वो बोली- मैं तो इतने दिनों से आपको आते जाते देखती हूँ, पर आप कभी इधर देखते ही नहीं। मैं क्या कहता, मैंने कहा- बस अपने ही काम में व्यस्त रहता हूँ ! लेकिन अन्दर ही अन्दर मैं जानता था कि सच्चाई क्या है। दरअसल भाभी जी बड़ी सेक्सी थीं, वो हलकी सांवली इकहरे बदन की थी, साथ ही एक दम कसा हुआ ब्लाउज पहनती थी, जिससे उनके गोल गोल उभार नज़र आते थे और मेरे मकान मालिक के बेटे की नज़र भी उन पर थी। साथ ही साड़ी का पल्लू भी लटकता था जिससे सब कुछ साफ था, पर मैं चुप ही रहा। बात बात में उन्होंने मेरा नाम पूछा और मैंने उनका ! तो उन्होंने बताया कि उनका नाम सुगंधा है और उन्होंने यह भी कहा कि मैं शाम को चाय उनके यहाँ ही पिया करूँ और उनके बच्चों को पढ़ा भी दिया करूँ ! तो मैंने कहा- पढ़ाना तो मुश्किल है क्यूंकि मेरे पास फिक्स टाइम नहीं है पर जब भी जरुरत हो बता देना, मैं आकर उन्हें मदद कर दूंगा। धीरे धीरे वो रोज ही मिलने लगी। जब मैं शाम को ऑफिस से लौटता तो वो सड़क पर ही खड़े होकर बात करने लगती। लोगों की नज़र में भी कुछ गलत नहीं था क्यूंकि मैं अक्सर उनके बच्चो को सड़क पर ही किताब से सवाल समझा देता या वो मेरे पास आकर पूछ लेते, और मेरे और भाभी के बीच करीब ८-९ साल का अंतर भी था। एक दिन मैं उनके घर गया तो वहां कोई नहीं था। अन्दर तक देखने पर कोई नहीं दिखा तो मैंने आवाज़ दी- भाभी जी ! फिर भी कोई जवाब नहीं आया मुझे लगा कि शायद छत पर होंगी और मैं लौटने लगा और फिर आवाज़ दी तो बोली- इधर आ जाओ ! मैं यहाँ हूँ ! मैं उस तरफ गया तो कोई नहीं दिखा। अचानक से उनके बाथरूम का दरवाज़ा खुला और मैं सकपका गया। वो बिलकुल गीले बदन नहाई हुई मेरे सामने खड़ी थी और बदन पर सिर्फ एक झीने से कपड़े की चुन्नी थी। मैं घूमने लगा तो बोली- शरमा गए क्या शर्मा जी? लगता है तुमने आज तक कोई नंगी लड़की या औरत नहीं देखी ! बात भी सच थी कि मैंने गांड तो बहुत मारी थी और नंगी लड़कियाँ किताबों और इन्टरनेट पर देखी थी पर सामने कोई नहीं। मैंने कहा- शर्माने की ही बात है, मुझे माफ़ कीजिये, मुझे पता नहीं था, मैं बाहर इन्तज़ार कर रहा हूँ ! वो बोली- इन्तज़ार में कहीं गाड़ी न छूट जाये ! और मेरा हाथ पकड़ लिया। उन्हें देख कर मेरे लंड से पानी चूने लगा था। वो बोली- जब मैं लड़की होकर नहीं शरमा रही, तो तुम क्यों शरमा रहे हो ! और उन्होंने मुझे अपने करीब घसीट लिया। अब मेरे और उनके बीच में सिर्फ ६ इंच की दूरी थी। सर नीचे करता तो निगाहें उनकी चुचियों पर जाती और ऊपर करता तो उनकी आँखों की हवस मुझे खाए जा रही थी। मेरा लण्ड भी तन रहा था और धीरे धीरे उनकी नाभि से टकराने लगा। उसे देख कर वो बोली- तुम शरमा रहे हो पर तुम्हारा ये नहीं शरमा रहा ! देखो कैसे मेरे बदन को सलामी दे रहा है ! और उन्होंने मेरा लंड पकड़ लिया। फिर तो ऐसा लगा कि अभी झड़ जायेगा। मैंने बड़ी मुश्किल से अपना लण्ड छुड़ाया और उनसे पूछा- आपको क्या चाहिए? वो बोली- वही जो अभी पकड़ा था। मैंने कहा- मेरे पास कंडोम नहीं है ! वो बोली- कोई बात नहीं, डरो मत ! मैं भी कोई ऐसी वैसी नहीं हूँ सिर्फ अपने पति से ही खुश हूँ, लेकिन तुम्हें देख कर मेरे मन में फिर से चुदाई के बादल उमड़ने घुमड़ने लगे हैं और मैं यह भी जानती हूँ कि तुम भी छुप छुप कर अपने खिड़की से मुझे देखते हो। जब बात खुल ही गई थी तो मैंने भी कह दिया- हाँ, आप मुझे अच्छी लगती हो ! उन्होंने मुझे जोर से भींच लिया और मेरा सर झुकाकर अपनी चुचियों में दबा लिया। मैंने भी उनकी चूचियां चूसनी चालू कर दी। तो वो बोली- यहीं करोगे या बिस्तर पर? फिर मैं उनके बेडरूम में गया, जहाँ उन्होंने चुन्नी हटा दी और मुझे नंगा करने लगी। वैसे भी उन्हें ज्यादा दिक्कत नहीं हुई क्यूंकि मैंने एलास्टिक वाला निक्कर और टी-शर्ट पहनी थी। उसे उतार कर उन्होंने मेरे कच्छे पर भूखी शेरनी
जैसी निगाह डाली और एक ही बार में उसे नीचे कर दिया। मेरा लंड तन चुका था। उन्होंने तुंरत उसे चूसना शुरू किया और २ मिनट बाद मुझे लगा कि मैं झड़ने वाला हूँ, तभी मैंने उसे निकाल लिया। वो बोली- क्या हुआ? फ़ुस्स हो गए क्या ? मैंने कहा- नहीं ! हो जाऊंगा ! वो बोली- कोई बात नहीं ! मुझे मालूम है कि तुम्हारा लण्ड अभी कुंवारा है इसीलिए मैं तुम्हें प्रैक्टिस करा रही हूँ जिससे तुम्हारी बीबी को दिक्कत न हो। वो फिर चूसने लगी और मैंने उनके मुँह में ही सारा माल टपका दिया और वो बड़े प्यार से उसे निगल गई। अब तो मेरा पौने सात इंच का लण्ड सिकुड़ कर सिर्फ ढाई इंच का ही रह गया था तो मैं शरमाने लगा। वो बोली- शरमाओगे ही या कुछ और भी करोगे ? मुझे लगा कि अब तो इसकी चूत का भोसड़ा बनाना ही पड़ेगा। अब यह वो वक़्त था जब मेरा गांड मारने का अनुभव काम आता। मैंने उसकी चुचियों को चूसना शुरू किया और उनसे खेलने लगा। पहले दाईं वाली फिर बाईं वाली और कभी कभी दोनों ! चूसते दबाते करीब आधा घंटा हो गया था। उसकी दोनों चुचियाँ सांवले से लाल रंग की हो गई थी और चूचुक ऐसे लग रहे थे जैसे उनसे अभी खून टपक जायेगा। वो बोली- क्या हाल कर दिया है तुमने इनका ! मैंने कहा- सॉरी ! अभी नया नया हूँ न ! तो वो मुस्कुरा उठी और फिर मेरा लंड चूसने लगी। अब तो मेरा लंड अखाड़े में खड़े दारा सिंह जैसा हो गया था। सारी नसें खून से भरी थी और लग रहा था कि अभी शायद पौने सात से बढ़कर १५ इंच का हो जायेगा। आखिर पहली बार चूत का स्वाद जो मिल रहा था। वो मेरे लंड को मुँह में लेकर अन्दर बाहर कर रही थी। कभी कभी मैं उसका सर दबा देता तो वो उसके गले के अन्दर तक धंस जाता और वो खांसने लगती। करीब १० मिनट बाद मैंने कहा- अब मेरी बारी ! मैंने उसकी टांगे फैलाईं और किताबों में पढ़े हुए अनुभव आजमाने लगा। उसकी चूत पर हलके हलके जीभ फिराने लगा और फिर अन्दर बाहर करने लगा। उसकी भगनासा फूल कर मोटी हो गई थी। उसकी चूत को दस मिनट तक ऐसा चूसा कि वो सूज गई और अचानक से भाभी अपनी कमर उचकाने लगी, ऊपर-नीचे, ऊपर-नीचे ! मैंने कहा- क्या कर रही हो ! चूसने तो दो ! वो बोली- बहुत चूस चुके, अब जरा असली काम करो ! तो मैंने अपने लंड को सहलाया और सुपाड़े के ऊपर से खाल को पीछे सरका कर उनकी चूत के मुँह पे रख दिया। उनकी चूत एक दम कुंवारी लड़की जैसी टाइट थी, वो बोली- डाल दो ! क्यूंकि अब वो बहुत गरम थी, लेकिन मैं नहीं चाहता था कि वो इतनी जल्दी झड़े। मैं उनकी चूत के ऊपर अपना लंड घिसने लगा और १ मिनट बाद सिर्फ सुपाड़ा ही अन्दर सरकाया तो वो कराह उठी। मैंने कहा- तुम्हें तो अनुभव है, फिर क्यों चिल्ला रही हो?वो बोली- करीब तीन साल से एक भी बार सेक्स नहीं किया है, जबसे छोटा बेटा हुआ है, क्यूंकि कम उम्र में ही शादी हो गई थी और तब मैं १८ साल की थी और तुम्हारे भैया करीब ३४ साल के ! गाँव की शादी थी, उन्होंने तब चोदा था जम के। फिर पहला बच्चा होने के बाद हमारे बीच में सम्बन्ध न के बराबर ही बने सिर्फ गिनती के। शराब के कारण मैं उन्हें मुँह नहीं लगाती और कभी कभी वो लंड खड़ा करने की गोली खाकर आते थे तब चुदाई होती थी। लेकिन अब जब वो करीब तीस की थी और भैया हो चुके थे। ४४-४५ के तो भैया के लंड में दम नहीं रह गया था और वो सही से खड़ा भी नहीं होता था। मैंने कहा- सारी कहानी अभी बता दोगी या चुदवाओगी भी? वो बोली- आराम आराम से करो ! फिर तो मैंने उस कुंवारी जैसी चूत को कुंवारा जैसा ही चोदा। धीरे धीरे ५-७ मिनट हलके से ही सिर्फ सुपाड़ा ही अन्दर बाहर करके पहले रास्ता बनाया फिर एक हल्का झटका देकर करीब आधा लंड अन्दर किया तो उनके आँखों में संतुष्टि नज़र आई और फिर स्पीड बढ़ाई और करीब २ मिनट बाद एक ही झटके में अपनी फतह का झंडा जैसे ही उनकी चूत की जमीन पे फहराया तो उनकी आँखों से आंसू निकालने लगे, वो बोली- बाहर करो ! मैंने कहा- भाभी अब तो ये बोफोर्स तोप झंडा फहरा कर ही वापस आयेगी ! भाभी की आँखों से आंसू बह रहे थे जो उनकी चूत के कुंवारे होने का सुबूत दे रहे थे। तभी भाभी की आँखों के आंसू थमने लगे और और वो जोर जोर से सिसकियाँ लेने लगी। अचानक से उन्होंने मुझे बड़ी जोर से पकड़ा और चूत उछालने लगी और मुझसे लिपट गई। मैंने कहा- क्या हुआ भाभी? वो बोली- बस, अब रुक जाओ !मैंने कहा- वो तो ठीक है लेकिन अभी तोप में गोले बाकी हैं ! इन्हें कहाँ करूँ ?वो बोली- मेरे मुँह में कर दो ! मैंने कहा- वो तो हो चुका, अब जरा कुछ और ! वो बोली- क्या ?तो मैंने उनकी गांड में ऊँगली डाल दी। वो बोली- नहीं ! तो मैंने कहा- फिर मैं गुस्सा हो जाऊंगा और दोबारा फिर ये कभी नहीं होगा। आखिर वो भी मजबूर थी और मान गई। अब मैंने उनकी टांगे अपने कन्धों पे रक्खी और एक ही बार में पूरा लंड उनकी गांड में पेल दिया। उनकी तो गांड फट गई, वो चिल्लाने लगी जैसे मैं उनका गला दबा रहा था। मैंने कहा- चिल्लाओ मत ! और उनका मुँह अपने हाथ से बंद किया और २-३ मिनट तक अपने लंड वैसे ही उनकी गांड में पड़े रहने दिया। फिर जब वो थोडा संभली तब मैंने फिर से चोदना शुरू किया और ३-४ मिनट में ही भाभी अपनी गांड भी चूत की ही तरह उछालने लगी। फिर मैं भी थक गया था, स्पीड बढा दी और कुछ ही देर में मैंने उनके अन्दर अपना वीर्य छोड़ दिया। भाभी अब काफी संतुष्ट थी। फिर मैं भी अपने लंड पर इतरा रहा था
और भाभी भी उसकी मर्दानगी की प्रशंसा कर रही थी। फिर मैं घर आ गया और इसी तरह कई बार जब वो अकेले में होती तो उन्हें जमकर चोदा, कभी कुत्ते वाली स्टाइल में तो कभी ६९ पोजीशन में और जो भी उलटी सीधी पोजीशन किताबों में दिखी उसमें ! क्यूंकि वो तो मुझे प्रैक्टिस करवा रही थी और मैं उनका शिष्य था।